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Webakhbar.com में आपका स्वागत है। यह मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्द्र दुमका, झारखंड निबंधन संख्या : 159/2012-2013 द्वारा प्रकाशित/संचालित एवं रवि कान्त सुमन द्वारा संपादित हिंदी दैनिक वेब अखबार है। इसके सफल संचालन/प्रकाशन में कोई भी भारतीय नागरिक व्यक्तिगत अथवा संस्थागत अपनी ओर से शुभकामना संदेश एवं विज्ञापन देकर हमारी मदद कर सकते है। इसके लिए मोबाइल संख्या 07870361716, ईमेल : msspkdumka@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। आप हमें जनता से जुड़ी हर प्रकार की सूचनाएं editorwebakhbar@gmail.com पर दे सकते है। शुभकामना संदेश एवं विज्ञापन के लिए संबंधित सभी व्यक्ति/संस्था को मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्द्र दुमका द्वारा निर्धारित अनुदान राशि देय होगा। धन्यवाद

आरटीआई : केन्‍द्रीय सूचना आयोग
के वेबसाइट पर है सबकुछ
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केन्‍द्रीय सूचना आयोग, नई दिल्‍ली के वेबसाइट
पर आरटीआई से संबंधित हर प्रकार की
विस्‍तृत जानकारी उपलब्‍ध है। आयोग के वेबसाइट

www.cic.gov.in पर आरटीआई के मामले में
ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की भी सुविधा
प्रदान की गयी है। इसमें देश के सभी राज्‍य के
सूचना आयोग का लिंक भी दिया गया है। अत:
आरटीआई यानी सूचना का अधिकार से संबंधित
किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करने के
लिए केन्‍द्रीय सूचना आयोग के वेबसाइट
www.cic.gov.in का अवलोकन किया जा सकता है।

 
 

 

झारखण्ड के सूचना आयुक्त पीआर दास ने ली शपथ
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रांची, 04 अप्रैल 2013, वेबअखबार। राज्यपाल डॉ0 सैयद अहमद ने 03 अप्रैल को राजभवन के दरबार हॉल में प्रबोध रंजन दास को सूचना आयुक्त, झारखण्ड के पद की शपथ दिलायी। शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल के परामर्शी मधुकर गुप्ता एवं के0 विजय कुमार, राज्य के मुख्य सचिव आरएस शर्मा सहित भा0प्र0से0 तथा भा0पु0से0 के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।
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मांगें सूचना पायें जवाब, आपका अपना अधिकार, सूचना का अधिकार
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भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है, इसलिए जनता को यह जानने का हक है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनायी गयी है वह क्या, कहां और कैसे कार्य कर रही है। इसके साथ ही हर नागरिक इस सरकार को चलाने के लिए कर देता है, इसलिए भी नागरिकों को यह जानने का हक है कि उनका पैसा कहां खर्च किया जा रहा है। जनता को जानने का यह अधिकार ही सूचना का अधिकार (Right To Information) है। इसे संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम 12- अक्टूबर 2005 से जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में लागू है। सूचना का अधिकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अधिकार सम्पन्न बनाना, सरकार की कार्य प्रणाली में पारदर्षिता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार खत्म करना तथा लोकतंत्र को सही अर्थों में लोगों के हित में काम करने में सक्षम बनाना है। इसके तहत प्रत्येक नागरिकों को किसी लोक प्राधिकारी से ऐसी सूचना मांगने का अधिकार है जो उस लोक प्राधिकारी के पास या उसके नियंत्रण में उपलब्ध है। सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लोक प्राधिकारी द्वारा सूचना सृजित करना या सूचना की व्याख्या करना या आवेदक द्वारा उठायी गयी समस्याओं का समाधान करना या काल्पनिक प्रश्नों का उत्तर देना अपेक्षित नहीं है।
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सूचना मांगने की विधि - यदि कोई नागरिक अधिनियम के अंतर्गत सूचना प्राप्त करना चाहता है तो उसे लोक प्राधिकरण के संबंधित जन सूचना अधिकारी को निर्धारित दस रूपये शुल्क के साथ आवेदन देना होगा। शुल्क नगद, बैंक ड्राफट, बैंकर चेक, भारतीय पोस्टल आडर आदि के माध्यम से देने का प्रावधान है। नगद शुल्क जमा करने पर आवेदनकर्त्‍ता को रसीद अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए। गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के अंतर्गत आने वाले आवेदनकर्त्‍ताओं को किसी प्रकार का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है। उसे आवेदन के साथ केवल गरीबी रेखा के नीचे स्तर का होने का प्रमाण पत्र देना जरूरी होगा। आवेदन व्यक्तिगत रूप से अथवा डाक या इलेक्ट्रानिक माध्यम से भेजा जा सकता है।

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आरटीआई अधिनियम
भारत सरकार ने सदैव अपने नागरिको के जीवन को सहज ,सुचारु बनाने पर बल दिया है और इस प्रकार इसे ध्यान मेंरखते हुए भारत को पूरी तरह लोक तांत्रिक बनाने के लिए आरटीआई अधिनियम स्थापित किया गया है।
आरटीआई का अर्थ है सूचना का अधिकार और इसे संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। धारा 19 (1),जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है और उसे यह जाननेका अधिकार है कि सरकार कैसे कार्य करती है ,इसकी क्या भूमिका है, इसके क्या कार्य हैं आदि।
प्रत्येक नागरिक कर का भुगतान करता है अत: इसे अधिकार मिलते हैं और साथ ही उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके द्वारा कर के रूप में दी गई राशि का उपयोग कैसे किया जा रहा है।
सूचना का अधिकार अधिनियम प्रत्येक नागरिक को सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार देता है और इसमें टिप्पणियां, सारांश अथवा दस्तावेजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों या सामग्री के प्रमाणित नमूनों की मांग की जा सकती है।
आरटीआई अधिनियम पूरे भारत में लागू है (जम्मू और कश्मीर राज्य के अलावा) जिसमें सरकार की अधिसूचना के तहत आने वाले सभी निकाय शामिल हैं जिसमें ऐसे गैर सरकारी संगठन भी शामिल है जिनका स्वामित्व, नियंत्रण अथवा आंशिक निधिकरण सरकार द्वारा किया गया है।
आरटीआई अधिनियम एक लोक प्राधिकरण द्वारा धारित सूचना तक पहुंच का अधिकार प्रदान करता है। यदि आपको किसी प्रकार की सूचना देने से मना किया गया तो आप केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष अपील / शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
(जनहित में केन्द्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली के वेबसाइट www.rti.india.gov.in पर जारी )
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व्‍यक्तियों के समूह, संघ व कंपनी को भी है सूचना प्राप्‍त करने का अधिकार
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दुमका । आरटीआई सप्‍ताह के चौथे दिन 09-10-2012 को मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्‍द्र दुमका, झारखंड द्वारा जागरूकता अभियान के तहत जिला शिक्षा अधीक्षक दुमका को एक आवेदन भेजकर आरटीआई को बढावा देने की दिशा में केन्‍द्रीय सूचना आयोग के निर्णय सीआइसी/डब्‍ल्‍यू बी/सी/2007/104 व 105 दिनांक 17-5-2007 का अवलोकन कर किसी व्‍यक्तियों के समूह, किसी संघ या कंपनी को भी सूचना उपलब्‍ध कराने में आवेदकों का युक्तियुक्‍त सहायता प्रदान करने का निवेदन किया गया। गौरतलब है कि जिला शिक्षा अधीक्षक दुमका ने अपने पत्रांक 1764 दिनांक 08/09/12 के तहत संस्‍था के सचिव रवि कान्‍त सुमन को सेंट्रल इंफॉरमेंशन कमिशन डिसिजन्‍स में प्रकाशित लोक सूचना पदाधिकारी, दिल्‍ली विकास प्राधिकार के द्वारा अपील संख्‍या सीआइसी/ डब्‍ल्‍यू/ ए/ 2006/ 001944 दिनांक 11-4-06 का हवाला देते हुए सूचना देने से इंकार करते हुए बताया है कि आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत किसी व्‍यक्तियों के समूह, किसी संघ या कंपनी को सूचना का अधिकार प्राप्‍त नहीं है। जबकि जिला शिक्षा अधीक्षक के उक्‍त पत्र के आलोक में पूछे जाने पर केन्‍द्रीय सूचना आयोग, नई दिल्‍ली के नोडल केन्‍द्रीय जन सूचना अधिकारी एवं निदेशक पंकज के0 पी0 श्रेयस्‍कर ने दिनांक 24-09-2012 को संस्‍था के सचिव को एक पत्र भेजकर केन्‍द्रीय सूचना आयोग द्वारा दिये गये निर्णय सीआइसी/डब्‍ल्‍यू बी/सी/2007/104 व 105 दिनांक 17-05-2007 से अवगत कराया है, जिसमें स्‍पष्‍ट किया गया है कि आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत किसी व्‍यक्तियों के समूह, किसी संघ या कंपनी को भी सूचना का अधिकार प्राप्‍त है। इसलिए संस्‍था द्वारा जिला शिक्षा अधीक्षक दुमका से केन्‍द्रीय सूचना आयोग के उक्‍त निर्णय का अवलोकन कर किसी व्‍यक्तियों के समूह, किसी संघ या कंपनी को भी सूचना उपलब्‍ध कराने में आवेदकों का युक्तियुक्‍त सहायता प्रदान करने का निवेदन किया गया। आवेदन में संस्‍था ने जिला शिक्षा अधीक्षक को भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से प्राप्‍त आरटीआई अधिनियम 2005 के अन्‍तर्गत लोक सूचना अधिकारी के रूप में पदनामित अधिकारियों के लिए दिशा निर्देश के तहत यह भी बताया है कि आरटीआई अधिनियम 2005 के प्रावधानों के अनुसार जन सूचना पदाधिकारी का न केवल सूचना उपलब्‍ध कराना बल्कि सूचना प्राप्‍त करने में आवेदकों का युक्तियुक्‍त सहायता करना भी कर्त्‍तव्‍य है।

 

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सूचना का अधिकार से संबंधित विशेष जानकारी के लिए मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्द्र दुमका, के कुम्हारपाड़ा, दुमका - 814101, झारखंड स्थित निबंधित कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।


आरटीआई : पीआइओ आवेदन लेने से नहीं कर सकते इंकार
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08-10-2012 को मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्द्र दुमका द्वारा छात्रों के बीच परिचर्चा का आयोजन किया गया। सूचना का अधिकार विषय पर आयोजित इस परिचर्चा की शुरूआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारतीय संविधान के निर्माता डॉ0 भीमराव अम्बेदकर की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर किया गया। पुरातत्व खोजकर्त्ता पंडित अनूप कुमार वाजपेयी की
 अध्यक्षता में हुई इस परिचर्चा में बतौर विषय विशेषज्ञ अधिवक्ता अमरेन्द्र सुमन ने छात्रों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। श्री सुमन ने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें सूचना का अधिकार क्या है, इसके तहत सूचनाएं कैसे मांगी जाती है, सूचना क्या है, सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन कैसे लिखा जाता है, इसके लिए निर्धारित शुल्क क्या है तथा निर्धारित समय पर सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपीलीय पदाधिकारी को आवेदन करने की जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जन सूचना पदाधिकारी, प्रथम अपीलीय पदाधिकारी और राज्य व केन्द्रीय सूचना आयोग की भूमिका व कर्त्त्व्य से भी अवगत कराया। संस्था के सचिव रवि कान्त सुमन ने छात्रों से सूचना का अधिकार के लिए जागरूक होने की अपील करते हुए मुख्य रूप से उन्हें जन सूचना पदाधिकारी और प्रथम अपीलीय पदाधिकारी की भूमिका से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत ऐसी सूचना जिसे संसद अथवा राज्य विधानमंडल को देने से इंकार नहीं किया जा सकता, उसे किसी व्यक्ति को देने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत केवल ऐसी सूचना प्रदान करना अपेक्षित है, जो लोक प्राधिकरण के पास पहले से मौजूद है अथवा उसके नियंत्रण में है। जन सूचना पदाधिकारी द्वारा सूचना सृजित करना या सूचना की व्यायख्या करना या आवेदक द्वारा उठायी गयी समस्याओं का समाधान करना या काल्पनिक प्रश्नों का उत्तर देना अपेक्षित नहीं है। उन्होंने छात्रों को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से भी अवगत कराया जिसमें सूचना का अधिकार के तहत किसी परीक्षा की उत्तर पुस्तिका को देखने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि अधिनियम में निहित प्रावधान के तहत जन सूचना पदाधिकारी किसी भी हाल में आवेदन लेने से इंकार नहीं कर सकता। उन्होंने प्रथम अपीलीय पदाधिकारी की भूमिका से अवगत कराते हुए छात्रों के बीच पशुपालन विभाग के संताल परगना क्षेत्रीय निदेशक सह प्रथम अपीलीय पदाधिकारी द्वारा संस्था के सचिव के एक आवेदन के आलोक में जिला पशुपालन पदाधिकारी दुमका को दिये गये उस निदेश की प्रतिलिपि भी सार्वजनिक किया जिसमें कहा गया है कि निर्धारित समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराना सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का खुल्लम-खुल्ला उलंघन है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में पंडित अनूप कुमार वाजपेयी ने छात्रों को अपने अधिकार के प्रति जागरूक रहने की सीख देते हुए सूचना का अधिकार का न्यायसंगत इस्तेमाल करने को प्रेरित किया। परिचर्चा में विभिन्न वर्गों के छात्रों में अप्पू कुमार, मुकेश राय, कन्हैया कुमार साह, रूपेश कुमार पाल, कुंदन कुमार, मनीष कुमार साह, जयदीप कुमार गुप्ता और चंदन कुमार साह शामिल थे।
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