Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
दुमका में लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ संपन्न, अंतिम दिन कृष्ण-सुदामा की कथा... खेल को बढ़ावा देने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर पहुंचे जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी आतिशबाजी,भजन और पुष्प वर्षा के बीच हुआ श्री कृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव, दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं क... दुमका में फिर गूंजेगा क्रिकेट का शोर, 5 अप्रैल से शुरू होगा दुमका प्रीमियर लीग, खिलाड़ियों का रजिस्ट... लक्ष्मीनारायण यज्ञ में धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बाल गोपाल की झलक पाने को उमड़े श्रद्... दुमका के विकास विद्यालय में अनोखा ग्रेजुएशन डे : गाउन-कैप और रंग-बिरंगे परिधानों में मंच पर उतरे नन्... देश में कैंसर के बढ़ते खतरे पर झामुमो नेता राजेश कुमार सिंह की पहल, पीएम नरेंद्र मोदी से की कैंसर स्... संसार के कोलाहल से मुक्ति का मार्ग केवल ईश्वर की शरणागति और सत्संग : स्वामी आगमानंद जी महाराज कृष्ण भक्ति की अनूठी मिसाल : 12 साल वृंदावन साधना के बाद भिक्षाटन कर बना दिया श्री राधा श्याम सुंदर ... लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दूसरे दिन उमड़ा आस्था का सैलाब, स्वामी आगमानंद जी महाराज की कथा में डूबे श...

आतिशबाजी,भजन और पुष्प वर्षा के बीच हुआ श्री कृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव, दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

0 44

दुमका। दुमका शहर के बड़ा बांध परिसर में आयोजित ‘श्री श्री 1008 लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ’ के छठे दिन शुक्रवार को उस समय पूरा पंडाल भक्तिमय उल्लास से भर उठा, जब मंच पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री रामचंद्राचार्य जी महाराज (परमहंस स्वामी श्री आगमानंद जी महाराज) के सानिध्य में चल रहे इस महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक विवाह उत्सव का दर्शन किया।

भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम

कथा के दौरान जैसे ही रुक्मिणी विवाह का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ इस दिव्य विवाह का उत्सव मनाया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।आतिशबाजी और प्रसाद वितरणविवाह की खुशी में श्रद्धालुओं ने जमकर आतिशबाजी की, जिससे पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठा। आयोजन समिति की ओर से बड़ी मात्रा में महाप्रसाद और मिठाइयों का वितरण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से ग्रहण किया।कथा में बताया रुक्मिणी विवाह का महत्वस्वामी श्री रामचंद्राचार्य जी महाराज ने कथा में बताया कि माता रुक्मिणी विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थीं और उन्होंने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया था।भाई रुक्मी के विरोध के बावजूद उनकी अटूट भक्ति और समर्पण ने भगवान श्रीकृष्ण को विदर्भ आने के लिए प्रेरित किया। महाराज जी ने कहा कि जब प्रेम निष्कलंक और भक्ति अडिग हो, तो स्वयं भगवान भक्त की रक्षा के लिए आते हैं।
भव्य झांकी ने मोहा भक्तों का मन
मंच पर सजी भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी की मनमोहक झांकी, पुष्प वर्षा और सुमधुर भजनों ने पूरे माहौल को दिव्य बना दिया। इस भव्य आयोजन से बड़ा बांध क्षेत्र मानो “मिनी द्वारका” में बदल गया। कथा के दौरान भगवान के पुत्र प्रद्युम्न की वीरता का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
आज होगा महायज्ञ का समापन


महायज्ञ के अंतिम चरण में शनिवार को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा का वाचन होगा, जिसके साथ इस ज्ञान महायज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न होगी।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.