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संसार के कोलाहल से मुक्ति का मार्ग केवल ईश्वर की शरणागति और सत्संग : स्वामी आगमानंद जी महाराज

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दुमका। शहर के बड़ा बांध परिसर में आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री रामचंद्रचार्य जी महाराज (परमहंस स्वामी श्री आगमानंद जी महाराज) ने अपनी अमृतवाणी से शिव चरित्र, जड़भरत कथा और नरसिंह अवतार जैसे दिव्य प्रसंगों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि “संसार के कोलाहल और मोह-माया से मुक्ति का एकमात्र मार्ग ईश्वर की शरणागति और सत्संग है।” उन्होंने कहा कि भक्ति दिखावा नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के बीच का मौन संवाद है। जब तक मनुष्य के हृदय में सरलता और निष्काम भाव नहीं आता, तब तक ईश्वर का साक्षात्कार संभव नहीं है।

कथा के प्रमुख प्रसंग

कथा की शुरुआत भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप एवं सती प्रसंग से हुई। इसके बाद स्वामी जी ने विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से जीवन का गूढ़ रहस्य समझाया।

पुरंजन की कथा

स्वामी जी ने बताया कि यह शरीर ही ‘पुर’ है और इसमें बंधा जीव माया के प्रभाव में आकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है।

ऋषभदेव और जड़भरत प्रसंग

राजा ऋषभदेव के त्याग और जड़भरत के वैराग्य का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है।

नरसिंह अवतार

नरसिंह अवतार का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने कहा कि जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है, तब भगवान स्वयं भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विश्वास अटूट हो तो ईश्वर हर कण में विद्यमान हैं।

वेद मंत्रों से गुंजायमान हुई यज्ञशाला

इससे पूर्व यज्ञाचार्य आचार्य अनिरुद्ध जी महाराज के निर्देशन में वेदों के स्वस्ति वाचन और दिव्य स्तुति के साथ यज्ञ अनुष्ठान संपन्न हुआ। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा श्रीसूक्त और पुरुषसूक्त के मंत्रों के साथ विशेष आहुतियां अर्पित की गईं। समिधा और घी की सुगंध तथा वैदिक मंत्रों की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर उठा।

भक्तों की उमड़ी आस्था

महायज्ञ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा कर यज्ञ नारायण भगवान के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। साथ ही देश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं शांति के लिए विशेष प्रार्थना भी की गई।

‘गुरु दरस-परस’ कार्यक्रम में मिला दिव्य सानिध्य

भक्तों की विशेष आग्रह पर महायज्ञ के पश्चात ‘गुरु दरस-परस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अपराह्न एक बजे से स्वामी आगमानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन दिए और उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर सैकड़ों भक्तों ने गुरु सानिध्य प्राप्त कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।

यज्ञ समिति के अध्यक्ष अरविन्द वर्मा, मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख उमाशंकर चौबे तथा कोषाध्यक्ष महेन्द्र प्रसाद साह सहित समिति के अन्य सदस्यों ने महायज्ञ में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन सनातन संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

धूमधाम से मनेगा श्री कृष्ण जन्मोत्सव 

समिति ने जानकारी दी कि बुधवार को धूमधाम के साथ श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। कथा के दौरान भगवान के जन्म उत्सव की झांकियां सजाई जाएंगी और पूरा वातावरण ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गुंजायमान होगा। स्वामी जी महाराज कान्हा की बाल लीलाओं का वर्णन करेंगे।

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