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दुमका में लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ संपन्न, अंतिम दिन कृष्ण-सुदामा की कथा सुन नम हुईं आंखें

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दुमका। शहर के ऐतिहासिक बड़ा बांध परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्री श्री 1008 लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ शनिवार को संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन आज श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री रामचंद्रचार्य जी महाराज (परमहंस स्वामी श्री आगमानंद जी महाराज) ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा और कृष्ण की मित्रता केवल दो मित्रों की कहानी नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के प्रेम का दिव्य प्रतीक है। महाराज जी ने बताया कि जब निर्धन सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारिका पहुंचे, तो भगवान श्रीकृष्ण नंगे पांव दौड़कर अपने सखा के स्वागत के लिए पहुंचे। उन्होंने सुदामा के चरणों को जल से नहीं, बल्कि प्रेम से भरे अपने आंसुओं से धोकर सच्ची मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान को धन-दौलत नहीं, बल्कि सच्चे भाव की आवश्यकता होती है। सुदामा की पोटली के दो मुट्ठी चावल से प्रसन्न होकर प्रभु ने उन्हें असीम कृपा और ऐश्वर्य प्रदान किया। इसके पश्चात द्वादश स्कंध की व्याख्या करते हुए राजा परीक्षित के मोक्ष और तक्षक दंश की लीला का वर्णन किया गया। गुरुजी ने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत का श्रवण ही मनुष्य को भवसागर से पार लगाने का सबसे सरल और पवित्र मार्ग है।कथा के साथ-साथ चल रहे लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का समापन यज्ञाचार्य आचार्य अनिरुद्ध जी महाराज के कुशल निर्देशन में शास्त्रीय विधि-विधान के साथ हुआ। वैदिक ऋचाओं के गुंजन के बीच विप्रों ने आहुतियां डलवाईं और भक्तों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।महायज्ञ के दौरान सर्वतोभद्र मंडल पूजन, प्रधान कुंड पूजन तथा विष्णु सहस्रनाम पाठ सहित विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। अंत में नाम संकीर्तन और सात्विक नारियल बलि के साथ विधिवत पूर्णाहुति कराई गई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इस भव्य आयोजन की सफलता के लिए स्वामी श्री आगमानंद जी महाराज ने आयोजन समिति के सदस्यों को मंच से आशीर्वाद दिया। उन्होंने अध्यक्ष अरविंद वर्मा, कोषाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद साह सहित प्रमुख सदस्य उमाशंकर चौबे, कौशल पांडेय, परितोष, अनीश, अमीश, संदीप कुमार साह, शिवशंकर चौधरी और अनिल तिवारी के समर्पण और परिश्रम की सराहना की। इस अवसर पर उन्हें अंगवस्त्र और धार्मिक ग्रंथ भेंट कर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन समिति के प्रमुख उमाशंकर चौबे ने किया। इस अवसर पर शिव शक्ति योगपीठ के स्वामी मानवानंद, स्वामी जीवनानंद, स्वामी तत्वानंद, कुंदन बाबा, डॉ.राम जन्म मिश्र, स्वामनोरंजन प्रसाद सिंह तथा प्राचार्य रविशंकर पांडेय सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कथा के अंतिम चरण में राजा परीक्षित के तक्षक दंश के पश्चात प्राप्त मोक्ष की व्याख्या की गई। इसके बाद “नाम संकीर्तनं यस्य…” के सामूहिक उद्घोष के साथ व्यासपीठ की आरती हुई और श्रद्धालुओं ने कथा के संदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। महायज्ञ और कथा की पूर्णाहुति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान “जय श्रीमन नारायण” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। महायज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत रविवार सुबह 7 बजे से भव्य कलश विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी।  जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। वहीं अगले दिन क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए शांति पाठ एवं भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन किया जाएगा।

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