दुमका। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर दुमका शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर गांदो गांव स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में इस वर्ष भी पूरे धूमधाम और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की गई। ऐतिहासिक महत्व रखने वाला यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मंदिर का इतिहास 130 वर्ष पुराना है।
दुमका के जाने-माने लेखक एवं पुरातत्वविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी की पुस्तक ‘पूर्वी भारत के दुमका जिला की धार्मिक सांस्कृतिक पुरातात्विक झलक’ में मंदिर की स्थापना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। पुस्तक के अनुसार, गांदो स्थित दुर्गा मंदिर की स्थापना श्रीमती रानी शिवसुंदरी ने वर्ष 1896 ईस्वी में कराई थी। उस समय बांग्ला सन् 1303 चल रहा था। बाद में वर्ष 1966 ईस्वी में रानी कमल कुमारी ने मंदिर की मरम्मत कराई। उस समय बांग्ला सन् 1373 था।
पहाड़िया राज और शौर्य की कहानियों से जुड़ा है गांदो
गांदो गांव का इतिहास केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। पंडित अनूप कुमार वाजपेयी की पुस्तक के अनुसार, गांदो कभी संकरा नामक इस्टेट का प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था। यहां पहाड़िया समुदाय का राज था। उनके शौर्य और पराक्रम की कहानियां आज भी जनमानस में प्रचलित हैं।
गांव में पुराने भवनों के अवशेष आज भी यहां के अतीत और तत्कालीन समृद्धि की गवाही देते हैं। 130 वर्षों से आस्था का केंद्र बना गांदो का दुर्गा मंदिर धार्मिक परंपरा के साथ क्षेत्र के इतिहास को भी अपने भीतर समेटे हुए है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां होने वाली पूजा-अर्चना इस ऐतिहासिक धरोहर के प्रति लोगों की श्रद्धा और जुड़ाव को दर्शाती है। ##### webakhbar.com
