
काउंसलर, ब्लड सेंटर दुमका
दुमका। रक्त की एक-एक बूंद किसी जरूरतमंद के लिए जीवन का आधार बन सकती है। ब्लड सेंटर दुमका के काउंसलर नवनीत किशोर शिवम के अनुसार, जरूरत पड़ने से पहले रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ब्लड सेंटर में रक्त उपलब्ध रहने पर आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी कर मरीजों को कम समय में रक्त दिया जा सकता है।
वेबअखबार से बातचीत करते हुए ब्लड सेंटर के काउंसलर नवनीत ने बताया कि रक्त की मांग चिकित्सकीय सलाह और रक्त समूह के आधार पर तय होती है। उपलब्ध रक्त की जांच, क्रॉस मैचिंग और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के बाद मरीज या उसके परिजन को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। इस पूरी व्यवस्था में सुरक्षित संग्रह, परीक्षण और उचित भंडारण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यदि संबंधित रक्त समूह का रक्त उपलब्ध न हो, तो मरीज के परिजनों को रक्तदाता की तलाश करनी पड़ती है, जिससे आपात स्थिति में परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से विभिन्न रक्त समूहों का पर्याप्त भंडार बनाए रखना आवश्यक है।
समाज में जागरूकता बढ़ने के बावजूद नियमित स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति अभी अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हुई है। अधिकांश लोग किसी परिचित या मरीज की जरूरत पड़ने पर ही रक्तदान करते हैं। यह सराहनीय है, लेकिन रक्त की कमी दूर करने के लिए जरूरत से पहले रक्तदान करना अधिक प्रभावी उपाय है।
उन्होंने कहा कि मान लीजिए यदि दुमका जिले के कम से कम 200 स्वस्थ और पात्र लोग चिकित्सकीय मानकों के अनुसार नियमित रूप से रक्तदान करें, तो वर्षभर में सैकड़ों यूनिट रक्त संग्रहित किया जा सकता है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। स्वैच्छिक रक्तदान किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं रहता। यह दुर्घटना पीड़ितों, प्रसूताओं, गंभीर रोगियों और अनजान जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा में सहायक बन सकता है।
रक्तदान को केवल आपातकालीन अपील से जोड़ने के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का हिस्सा बनाना होगा। शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और स्वयंसेवी समूहों को नियमित रक्तदान शिविर आयोजित कर लोगों को रक्तदान की पात्रता, प्रक्रिया और भ्रांतियों के बारे में सही जानकारी देनी चाहिए।
नवनीत ने कहा कि रक्तदान महादान है, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा, जब हम किसी की पुकार का इंतजार किए बिना स्वेच्छा से आगे आएं। आइए, स्वैच्छिक रक्तदान को सामाजिक संस्कार और जन-आंदोलन बनाएं, क्योंकि हमारा छोटा-सा योगदान किसी को जीवन की नई उम्मीद दे सकता है।
दुमका जिला में है थैलेसिमिया के 82 मरीज
उन्होंने यह भी बताया कि दुमका जिला में वर्तमान में थैलेसीमिया के 82 मरीज है, जिन्हें नियमित रक्त की आवश्यकता पड़ती है।
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