–डॉ.राजीव रंजन सिन्हा
दुमका। दिशोम गुरु झारखंड के अभिभावक थे, साहस के प्रतीक थे, आदिवासियों, वंचितों की आवाज थे। उनका जाना झारखंड में एक युग का अंत है। महाजनों के शोषण के खिलाफ संघर्ष तथा आदिवासियों में शराबबंदी का प्रचार इस महान राजनीतिक संत को दिशोम गुरु बनाया। उनके भाषण का एक अंश जो उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान संताल परगना महाविद्यालय, दुमका में दिया था कि लोग बाहरी भीतरी की राजनीति करते हैं, जो गलत है। उन्होंने कहा था कि जो भी झारखंड में रहता है वो हमारा बच्चा है उसका देखभाल और संरक्षण मेरी जिम्मेदारी है। यह उनकी महानता का एक नमूना है। पूरा झारखंड आदरणीय शिबु सोरेन के अंतिम सफर से मर्माहत है। गुरुजी को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि!

(विशेष कार्य पदाधिकारी, विधि प्रकोष्ठ, सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका)