दुमका को मिला प्रकृति की गोद में एक नया सुंदर व भव्य श्री राधा कृष्ण मंदिर
दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका शहर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाके में भगवान श्री राधा कृष्ण के कई मंदिर है। इन मंदिरों के साथ दुमका के लोगों को एक और नया सुंदर व भव्य श्री राधा कृष्ण मंदिर मिल गया है। यह मंदिर दुमका शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर कोलहड़िया गांव में बना है। जामा प्रखंड के अंतर्गत आने वाला कोलहड़िया गांव नोनीहथवारी के निकट है। दुमका शहर के लोग यहां डंगालपाड़ा शिव मंदिर से मोरटंगा के रास्ते से आसानी से पहुंच सकते है। इस मंदिर का निर्माण कार्य इसी वर्ष पूरा हुआ है।
मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और मां राधा की सुंदर प्रतिमा विराजमान है। प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान 05 जून 2025 को पूरे धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ था। प्रतिमा राजस्थान के जयपुर से लाया गया हैं।प्रकृति की गोद में बने इस मंदिर में शनिवार को पूरे धूमधाम के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। मंदिर का यह पहला जन्माष्टमी था। इस पावन अवसर पर मंदिर में शनिवार को पूजा-अर्चना के बाद देर रात तक भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। रविवार को भंडारा व प्रसाद वितरण के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का उत्साह समारोह संपन्न हुआ। जन्माष्टमी के अवसर पर अच्छी संख्या में दुमका शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग मंदिर पहुंचे थे।

भगवान की प्रेरणा से बना है यह मंदिरइस मंदिर के संचालन के लिए राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया है। गया प्रसाद साह ट्रस्ट के अध्यक्ष, गणेश प्रसाद साह सचिव और अशोक कुमार साह कोषाध्यक्ष है। ट्रस्ट के अध्यक्ष गया प्रसाद साह ने वेबअखबार डॉट कॉम को बताया यह मंदिर उन्होंने भगवान की प्रेरणा से बनाया है।

श्री साह राजकीय पाॅलिटेकनिक, दुमका के सेवानिवृत्त शिक्षकेत्तर कर्मचारी है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद वे कुछ धार्मिक कार्य करने की सोच रहे थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात एक पुजारी से हुई। पुजारी ने कहा कि वे वृंदावन से आये है और वे कुमड़ाबाद में रहते है। पुजारी ने उन्हें भगवान श्री राधे कृष्ण का मंदिर बनवाने की सलाह दी। पुजारी के बताये अनुसार उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया। इस बीच उन्होंने उक्त पुजारी को खोजने का बहुत प्रयास किया, पर वे अभी तक नहीं मिले है। पुजारी की खोज में वे कुमड़ाबाद गांव भी गये थे, पर वहां भी उनका कोई अता-पता नहीं मिला। पुजारी के द्वारा दिये गये मोबाइल नम्बर से भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया। अब लोग कहते है कि पुजारी के रूप में वे भगवान ही थे जिन्होंने गया प्रसाद साह जी को मंदिर बनाने की प्रेरणा दी और चले गये।
महाराष्ट्र के कलाकारों ने बनाया है यह मंदिर
कोलहड़िया गांव के इस सुंदर व भव्य मंदिर का निर्माण कार्य महाराष्ट्र के कलाकारों के द्वारा पूरा किया गया है। राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट कोलहड़िया के कोषाध्यक्ष अशोक कुमार साह के अनुसार मंदिर के निर्माण कार्य में अब तक 1.50 करोड़ रूपये खर्च हुआ है, जिसका वहन अध्यक्ष गया प्रसाद साह के द्वारा किया गया है। मंदिर निर्माण कार्य के लिए किसी से किसी भी प्रकार का आर्थिक सहयोग नहीं लिया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए दिन भर खुला रहता है मंदिर
राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष अशोक कुमार साह ने बताया कि यह मंदिर सार्वजनिक है। मंदिर में कोई भी श्रद्धालु भगवान की पूजा-अर्चना व दर्शन के लिए आ सकते है। उन्होंने बताया कि मंदिर का पट प्रतिदिन सुबह 05 बजे खुल जाता है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह 07 बजे प्रातःकालीन आरती और शाम में 07 बजे संध्या आरती होती है। शाम में भजन-कीर्तन के बाद रात के 09 बजे मंदिर का पट बंद किया जाता है। कोषाध्यक्ष श्री साह ने बताया कि मंदिर में हर महीना 10 से 15 दिन तक भजन-कीर्तन होता ही रहता है।
संदीप दुबे है मंदिर के पुजारी

वर्तमान में संदीप दुबे मंदिर के पुजारी हैं। श्री दुबे प्रतिदिन मंदिर में विधिपूर्वक भगवान श्री कृष्ण और माता राधा की पूजा-अर्चना व आरती करते है। पुजारी श्री दुबे दुमका जिला के जामा प्रखंड अंतर्गत बरमसिया गांव के रहने वाले है। मंदिर के शुरुआती दिनों में नित्यानंद झा यहां के पुजारी हुआ करते थे। वे जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड के रहने वाले थे।