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सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में कुलपति की अध्यक्षता में समन्वय बैठक, कॉलेजों की समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर

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दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में गुरुवार को विश्वविद्यालय प्रशासन और अंगीभूत महाविद्यालयों के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए, जबकि सभी 27 अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रोफेसर इन चार्ज ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की नीतियों, निर्णयों और महाविद्यालयों की कार्यप्रणाली के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं का समाधान करना रहा। बैठक की शुरुआत में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से महाविद्यालयों को शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए गए। इसके बाद कॉलेजवार समस्याओं को सुना गया और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया गया। डीएसडब्ल्यू डॉ.जैनेन्द्र यादव ने कुलपति से प्रत्येक माह इस प्रकार की समन्वय बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों से संबंधित आवेदन सीधे विश्वविद्यालय में न भेजे जाएं, बल्कि महाविद्यालय के अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से प्रेषित हों, जिससे छात्रों को अनावश्यक रूप से विश्वविद्यालय का चक्कर न लगाना पड़े। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय से प्राप्त पत्रों के समय पर अनुपालन, पंजीकरण में सतर्कता, नामांकन के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन और कॉलेज स्तर पर प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित रखने पर बल दिया। प्रॉक्टर डॉ.राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। वहीं रजिस्ट्रार डॉ.राजीव रंजन शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के सेमिनार, वर्कशॉप या अवकाश (डीएल) से संबंधित मामलों का निपटारा महाविद्यालय स्तर पर ही किया जाए और केवल अत्यंत आवश्यक मामलों में ही विश्वविद्यालय को पत्राचार भेजा जाए। उन्होंने परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व एक ऑनलाइन बैठक आयोजित करने का भी आग्रह किया। वित्त पदाधिकारी डॉ.संजय कुमार सिन्हा ने वित्तीय मामलों में पूर्ण पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों का समय रहते समाधान किया जाए तथा सभी खर्च नियमानुसार बिल-वाउचर के माध्यम से ही किए जाएं। परीक्षा नियंत्रक डॉ.रीना नीलिमा लकड़ा ने परीक्षा संबंधी कार्यों में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि आंतरिक परीक्षाएं नियमानुसार महाविद्यालय स्तर पर आयोजित की जाएं, अंक समय पर विश्वविद्यालय को भेजे जाएं, परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरे जाएं और परीक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान कॉलेज स्तर पर ही किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की सूचना मोबाइल फोन से नहीं, बल्कि लिखित पत्र के माध्यम से ही दी जाए। सीसीडीसी डॉ.अब्दुस सत्तार ने निर्देश दिया कि किसी भी खर्च का प्रस्ताव भेजने से पहले महाविद्यालय अपने उपलब्ध फंड की स्थिति की जांच कर लें और विकास सहित अन्य समितियों की स्वीकृति के बाद ही निर्माण या विकासात्मक कार्य प्रारंभ करें। बैठक के दौरान महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की कमी, शिक्षकों की कमी, परीक्षा संचालन में कठिनाइयों और विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्रों के निपटारे में विलंब जैसी समस्याएं रखीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। कुलपति डॉ.कुनुल कंदीर ने सभी प्राचार्यों को छात्रहित में पारदर्शी ढंग से नियमों के अनुरूप कार्य करने, परीक्षा संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने तथा पूरे परीक्षा काल में केंद्राधीक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने महाविद्यालयों को अपने मेसेंजर के माध्यम से ही पत्र एवं आवश्यक दस्तावेज विश्वविद्यालय भेजने को कहा। इस महत्वपूर्ण बैठक को विश्वविद्यालय–महाविद्यालय समन्वय की दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता और छात्र सेवाओं में और अधिक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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