नारायण-नारायण! प्रभु को मेरा प्रणाम!
प्रभु : आइए नारद जी, आज उपराजधानी से क्या समाचार लाए हैं?
नारद जी : प्रभु, समाचार तो कई हैं। नगर परिषद् इन दिनों चर्चा में है। कुछ लोग इसे बदलाव की शुरुआत कह रहे थे, लेकिन अब चर्चा इस बात की है कि शुरुआत आखिर होगी कब?
प्रभु : ऐसा क्या हो गया?
नारद जी : प्रभु, सफाई मित्रों ने चुनाव के समय एक सपना देखा था। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि जीतते ही उनका मानदेय 12 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया जाएगा। अब हाल यह है कि बढ़ोतरी की बात तो दूर, चार-चार माह का बकाया मानदेय भी नहीं मिल पाया है। सफाई मित्र कह रहे थे कि “प्रभु, 15 हजार बाद में मिल जाए, पहले चार महीने की मेहनत की कमाई ही मिल जाए तो बहुत है।”

प्रभु : अरे! फिर अध्यक्ष जी क्या कर रहे हैं?
नारद जी : प्रभु, शायद वादों की फाइल भी भुगतान वाली फाइल के नीचे दब गई है। इधर प्लास्टिक विरोधी अभियान भी बड़े जोर-शोर से शुरू हुआ था। कुछ दिनों तक लगा कि शहर से प्लास्टिक विदा हो जाएगी, लेकिन अब लगता है कि अभियान ही विदा हो गया। प्लास्टिक तो फिर पहले जैसी मुस्कान के साथ बाजार में घूम रही है।
प्रभु : और कुछ?
नारद जी : प्रभु, पटवारी गली में नगर परिषद् के पुराने बंद पड़े शौचालय की जगह अचानक भवन बनने लगा। फिर उस पर रोक लग गई। अब लोग पूछ रहे हैं कि यह भवन पहले बना कैसे और रुका क्यों? जवाब खोजने वाले भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर प्रभु, नगर परिषद् में काम कम और चर्चाएं ज्यादा चल रही हैं। सफाई मित्र उम्मीद लगाए बैठे हैं, शहर अभियान का अगला अध्याय खोज रहा है और जनता समझने की कोशिश कर रही है कि चुनावी घोषणापत्र आखिर सपना था, संकल्प था या फिर सिर्फ चुनावी साहित्य।
बाकी प्रभु… उपराजधानी में सब कुछ ठीक-ठाक है।
नारायण-नारायण! 👏
