दुमका। वर्दी का मतलब केवल कानून-व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि जरूरत के समय इंसान के साथ खड़ा होना भी है। श्रावणी मेला-2026 के दौरान बाबा बासुकिनाथ धाम में तैनात पुलिस जवान कुंदन कुमार ने अपने सेवा-भाव से इसी सोच को साकार किया है। ड्यूटी के दौरान दिव्यांग श्रद्धालुओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता और मदद का जज्बा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। कुंदन कुमार की तस्वीर सामने आई है, जिसमें वे एक दिव्यांग श्रद्धालु को अपनी गोद में उठाकर सुरक्षित ले जाते दिखाई दे रहे हैं। भीड़ और मेले की भागदौड़ के बीच जब श्रद्धालु के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हुआ, तब जवान ने अपनी ड्यूटी को मानवीय संवेदना से जोड़ते हुए खुद मदद का हाथ बढ़ाया। उनके लिए यह महज एक ड्यूटी नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद की सहायता करने का अवसर था।उनकी इसी संवेदनशीलता, मानवता और कर्तव्यनिष्ठा को संताल परगना क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक कार्यालय ने भी सराहा। 24 अगस्त को जारी पत्र में पुलिस आरक्षी संख्या 157 कुंदन कुमार के बाबा बासुकिनाथ धाम में ड्यूटी के दौरान दिव्यांग श्रद्धालुओं के प्रति विशेष सहयोग की प्रशंसा की गई। पत्र में कहा गया कि उनके सराहनीय एवं अनुकरणीय कार्य से आमजन और श्रद्धालुओं के बीच झारखंड पुलिस की सकारात्मक एवं जनहितैषी छवि मजबूत हुई है। इसके लिए उनका मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें 8,000 रुपये की नकद राशि से पुरस्कृत किया गया। कुंदन कुमार की यह तस्वीर बताती है कि वर्दी की असली ताकत केवल अधिकार में नहीं, बल्कि उस संवेदना में है जो किसी कमजोर व्यक्ति का सहारा बन जाए। बाबा की नगरी में एक श्रद्धालु के लिए जवान का यह मानवीय रूप निश्चित रूप से उन तमाम पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणा है, जो सेवा को केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि मानवता का माध्यम मानते हैं। कुंदन कुमार को मिला यह सम्मान केवल एक जवान का सम्मान नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जिसमें वर्दी पहनने वाला व्यक्ति जरूरतमंद के लिए सहारा बनता है।
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