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कृष्ण भक्ति की अनूठी मिसाल : 12 साल वृंदावन साधना के बाद भिक्षाटन कर बना दिया श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर

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रवि कांत सुमन, दुमका

कहते हैं सच्ची भक्ति में अपार शक्ति होती है। जब मन पूरी तरह भगवान की शरण में समर्पित हो जाता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है। ऐसी ही अद्भुत भक्ति की मिसाल दुमका रेलवे स्टेशन से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित मुखराली गांव में देखने को मिलती है, जहां एक कृष्ण भक्त ने भिक्षाटन कर भगवान श्री कृष्ण और राधा का एक सुंदर मंदिर खड़ा कर दिया। मुखराली गांव में स्थित श्री श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर आज श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन चुका है। इस मंदिर का निर्माण 67 वर्षीय कृष्ण भक्त दुर्गा चरण पद ने अपनी अटूट श्रद्धा और समर्पण से कराया है। मंदिर की स्थापना 08 मई 2017 को विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के साथ हुई थी।

दुर्गा चरण जी बचपन से ही भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1979 में दुमका के नेशनल हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। जीवन में दो बार उन्हें नौकरी का अवसर भी मिला—एक बार कोलकाता की जूट फैक्ट्री में और दूसरी बार दुमका में सरकारी शिक्षक के रूप में। लेकिन उनका मन सांसारिक जीवन में नहीं लगा और उन्होंने दोनों नौकरियां छोड़ दीं। इसके बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह श्री कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया। कृष्ण भक्ति की राह पर आगे बढ़ते हुए दुर्गा चरण जी वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक भक्ति साधना की। इसी दौरान उन्होंने महान संत श्री कृष्ण गोपाला नंददेव गोस्वामी प्रभुपाद महाराज से दीक्षा ग्रहण की। वृंदावन के रासकुंज के समीप स्थित उनके सेवा कुंज में दुर्गा चरण जी ने भक्ति और साधना का गहन अनुभव प्राप्त किया। बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनके पिता स्व.निताय चन्द्र पाल के आग्रह पर वे अपने गांव मुखराली लौटे। जब उन्होंने अपने गुरू से इस विषय में अनुमति मांगी, तब गुरू ने आशीर्वाद देते हुए कहा—“चिंता मत करो, तुम्हारे साथ राधा रानी और ठाकुर भी जाएंगे।” गुरू के इस आशीर्वाद के साथ दुर्गा चरण जी अपने गांव लौट आए और गांववासियों के बीच भगवान श्री कृष्ण और राधा का एक सार्वजनिक मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा। गांव के लोगों ने भी इसमें सहयोग का आश्वासन दिया। हालांकि मंदिर निर्माण के दौरान आर्थिक संकट सामने आया, लेकिन दुर्गा चरण जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने घर-घर जाकर भिक्षाटन किया और उसी से जुटाई गई राशि से मंदिर निर्माण का कार्य पूरा किया।

अंततः 08 मई 2017 को दुर्गा चरण जी के गुरु की उपस्थिति में मंदिर में राधा-कृष्ण की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा हुई। दुर्गा चरण जी बताते हैं कि यह मंदिर उनके गुरू के वृंदावन स्थित मंदिर के नाम पर ही स्थापित किया गया है, इसलिए वे इसे वृंदावन का एक शाखा मंदिर मानते हैं।

आज यह मंदिर मुखराली और आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां प्रतिदिन भगवान श्री कृष्ण और राधा की पूजा-अर्चना होती है और समय-समय पर भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

दुर्गा चरण जी का कहना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले कई भक्तों की मनोकामनाएं भगवान श्री कृष्ण ने पूरी की हैं। यही कारण है कि यह मंदिर केवल पूजा का स्थल ही नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और भक्ति का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

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