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विशेष बच्चों के सर्वांगीण विकास को समर्पित रहा विकास विद्यालय का समर कैंप, समापन पर बच्चों ने किये इस्कॉन मंदिर के दर्शन

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दुमका। विकास विद्यालय द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष समर कैंप “अनुशीलन भाग-3” का रविवार को स्थानीय इस्कॉन मंदिर में भक्तिमय वातावरण के बीच भव्य एवं भावपूर्ण समापन हुआ। समापन के अवसर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। यह समर कैंप विशेष रूप से एडीएचडी, स्पीच डिले, ऑटिज़्म एवं अन्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया था। समारोह की शुरुआत मधुर भजन-कीर्तन से हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय भाव से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर मंदिर प्रभारी सत्यबाक गुरुदास प्रभु ने अभिभावकों एवं बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि “माता ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है।” उन्होंने बच्चों के जीवन में संस्कार, सत्संग और अध्यात्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल्यावस्था में आध्यात्मिक वातावरण बच्चों के मानसिक संतुलन, नैतिक विकास और व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यालय के निदेशक नवीन मिश्रा ने समर कैंप की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि कैंप की रूपरेखा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। सात दिनों तक बच्चों के लिए योग, खेल, कला एवं शिल्प, संवाद कौशल, व्यक्तित्व विकास, जीवन कौशल तथा आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाने का प्रयास किया गया। विद्यालय की प्राचार्या ने कहा कि विकास विद्यालय का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा अपने भीतर विशेष प्रतिभा और क्षमता रखता है, आवश्यकता केवल उसे सही मार्गदर्शन और अवसर देने की होती है। समारोह के अंत में बच्चों को सात दिवसीय अनुभवों की यादों को संजोने के लिए सुंदर स्क्रैपबुक एवं आकर्षक उपहार प्रदान किए गए। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और खुशी साफ झलक रही थी। इसके बाद सभी अभिभावकों, अतिथियों एवं बच्चों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

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