21 साल के रौनक राज ने पेश की मिसाल, बोले—‘हमारा खून किसी की जान बचाने के काम आएगा, यही सबसे बड़ी खुशी है’

दुमका। किसी की जान बचाने के लिए हमेशा बड़े पद या बड़ी हैसियत की जरूरत नहीं होती, बल्कि जरूरत होती है एक संवेदनशील हृदय और दूसरों के लिए कुछ करने के जज्बे की। दुमका शहर के कुम्हार पाड़ा मोहल्ला निवासी 21 वर्षीय रौनक राज ने अपने रक्तदान से इसी भावना को साकार किया है। रौनक की पहल उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो समाज और देश के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं।

जब रौनक को जानकारी मिली कि मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्द्र दुमका की ओर से 11 अक्टूबर को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, तो उसने बिना देर किए फोन किया और रक्तदान के लिए अपना पंजीकरण करवा लिया। उसके इस फैसले में पिता प्रदीप कुमार साह उर्फ चप्पू जी का भी पूरा सहयोग रहा। उन्होंने अपने बेटे का हौसला बढ़ाया और उसे इस नेक कार्य के लिए प्रोत्साहित किया। रौनक फिलहाल एएन कॉलेज, दुमका से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ वह पुलिस सेवा और भारतीय सेना में भर्ती होने की तैयारी भी कर रहा है। देश की सेवा करने का सपना देखने वाला यह युवा रक्तदान के माध्यम से भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
रक्तदान करते समय चेहरे पर मुस्कान

रक्तदान के दौरान रौनक के चेहरे पर मुस्कान थी। जब उससे इस खुशी की वजह पूछी गई, तो उसने सहजता से कहा, “हमारा खून किसी की जान बचाने में काम आएगा, इसी की खुशी है।” उसके इस जवाब में रक्तदान का वास्तविक उद्देश्य और मानवता की सच्ची भावना झलकती है। रौनक ने बताया कि वह इससे पहले भी एक बार रक्तदान कर चुका है और आगे भी इस नेक कार्य को जारी रखेगा। उसका मानना है कि रक्तदान से बड़ा दूसरा कोई दान नहीं है। ईश्वर जब हमें किसी जरूरतमंद की जान बचाने का अवसर देते हैं, तो यह हमारे लिए सौभाग्य की बात होती है। किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने में हमारे रक्त की कुछ बूंदें काम आ सकती हैं, इससे बड़ी खुशी और क्या होगी!
युवाओं से रौनक की अपील—रक्तदान से पीछे न हटें
रौनक ने अपने जैसे अन्य युवाओं से भी स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। उसने संदेश दिया कि युवाओं को केवल अपने करियर और भविष्य के बारे में ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के बारे में भी सोचना चाहिए। रक्तदान ऐसा कार्य है, जिसके जरिए हम बिना किसी स्वार्थ के किसी जरूरतमंद की मदद कर सकते हैं।अक्सर लोग रक्तदान को लेकर डरते हैं या इसके महत्व को समझ नहीं पाते। लेकिन जरूरत के समय रक्त की एक यूनिट किसी मरीज के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। दुर्घटना के शिकार लोगों, ऑपरेशन कराने वाले मरीजों और थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों सहित अनेक जरूरतमंदों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता किसी परिवार के लिए उम्मीद की किरण बन सकते हैं।रक्तदान के लिए स्वस्थ और पात्र होना जरूरी है। इसलिए चिकित्सकीय जांच और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह के अनुसार रक्तदान करना चाहिए। स्वस्थ युवाओं को सही जानकारी प्राप्त कर इस मानवीय अभियान का हिस्सा बनना चाहिए।
संस्था ने की रौनक और उसके पिता की सराहना

इस अवसर पर मानव सूचना संग्रह सह प्रसार केन्द्र दुमका के सचिव रवि कान्त सुमन और भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, दुमका के चेयरमैन डॉ.राज कुमार उपाध्याय ने 21 वर्षीय रक्तवीर रौनक राज के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में रक्तदान के प्रति ऐसी जागरूकता और संवेदनशीलता दूसरे युवाओं को भी प्रेरित करेगी। दोनों ने रौनक के पिता प्रदीप कुमार साह के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपने बेटे को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार का ऐसा सकारात्मक सहयोग युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि रौनक राज की यह पहल एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण संदेश देती है—देश और समाज की सेवा करने के लिए वर्दी पहनना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। रक्तदान करके भी किसी अनजान व्यक्ति को नया जीवन मिलने की उम्मीद दी जा सकती है। #####
