हामर झारखंड रे’ गीत से दुमका की अनन्या सिन्हा ने बिखेरी झारखंड की लोकसंस्कृति की खुशबू, जल्द आएगा दुमका पर भी गीत
दुमका। झारखंड की मिट्टी की खुशबू, यहां की लोकपरंपराओं की मिठास और प्राकृतिक सुंदरता को गीतों में पिरोकर लोगों तक पहुंचाने की एक खूबसूरत पहल दुमका की बेटी अनन्या सिन्हा ने की है। उनके लिखे झारखंडी लोकगीत ‘हामर झारखंड रे’ ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को संगीत के जरिए सामने लाने का प्रयास किया है। अनन्या ने इस गीत को अपने यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है, जिसे श्रोताओं का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। खास बात यह है कि आने वाले दिनों में दुमका की खूबसूरती और पहचान पर आधारित एक गीत भी जल्द लोगों के सामने आने वाला है।
दुमका के वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र सिन्हा की पुत्री और हजारीबाग की बहू अनन्या का बचपन से ही नृत्य और गायन के प्रति गहरा लगाव रहा है। इसी रुचि को उन्होंने अपनी रचनात्मक पहचान बनाने का माध्यम बनाया। हजारीबाग के रामनगर में रहने वाली अनन्या का विवाह विवेक कुमार से हुआ है। दुमका से जुड़ी अपनी जड़ों और हजारीबाग से जुड़े पारिवारिक रिश्तों के बीच वह अपनी कला के माध्यम से पूरे झारखंड की पहचान को आगे बढ़ाने में जुटी हैं।
गीत में झारखंड के पर्यटन और धार्मिक स्थलों की झलक
‘हामर झारखंड रे’ केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि झारखंड की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को शब्दों में पिरोने की कोशिश है। गीत में रांची के पहाड़ी मंदिर, हजारीबाग का झंडा चौक, झील, कैनेरी हिल और पंच मंदिर के साथ देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम, दुमका के बासुकिनाथ धाम, रामगढ़ के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर जैसे प्रमुख स्थानों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा नेतरहाट, बेतला और पारसनाथ जैसे प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों को भी गीत में जगह मिली है। इन स्थानों के जरिए झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आस्था और ऐतिहासिक पहचान को संगीत के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया गया है।
सरहुल, करमा और सोहराय की संस्कृति को भी मिला स्थान
झारखंड की पहचान यहां के पर्व-त्योहारों और लोकजीवन से भी जुड़ी है। अनन्या ने अपने गीत में सरहुल, करमा और सोहराय जैसे पारंपरिक पर्वों की रंगीन छटा को भी शामिल किया है। खोरठा और नागपुरी भाषाओं के मिश्रित लोक अंदाज में तैयार इस गीत में हारमोनियम, ढोलक और मांदर जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया है। इससे गीत में स्थानीय लोकसंगीत की मिठास और झारखंड की सांस्कृतिक आत्मीयता महसूस होती है।
अनन्या का उद्देश्य झारखंड की लोकभाषाओं, संगीत और परंपराओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि यहां की लोकसंस्कृति में अपनी विशिष्ट पहचान और अद्भुत सुंदरता है। इसे नई पीढ़ी से जोड़ना और देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर भी बना रही हैं पहचान
अनन्या सिन्हा की लोकप्रियता सोशल मीडिया पर भी लगातार बढ़ रही है। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 1.24 लाख फॉलोअर्स हैं। वहीं, उनके यूट्यूब चैनल पर 32 हजार से अधिक सब्सक्राइबर हैं और उनके वीडियो को कुल मिलाकर 2 करोड़ 31 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। यह आंकड़े उनके रचनात्मक सफर और दर्शकों के बीच उनकी पहुंच को दर्शाते हैं।
अब दुमका पर गीत का इंतजार
‘हामर झारखंड रे’ के माध्यम से राज्य की व्यापक पहचान को स्वर देने के बाद अब अनन्या के अगले गीत को लेकर भी उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में दुमका पर आधारित गीत जल्द रिलीज होने की उम्मीद है। दुमका की धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विशेषताओं को गीत में किस अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। दुमका की बेटी अनन्या सिन्हा की यह संगीत यात्रा बताती है कि अपनी जड़ों से जुड़कर भी कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। लोकभाषाओं और पारंपरिक संगीत के सहारे झारखंड की पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की उनकी कोशिश राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक सकारात्मक पहल है। अब लोगों को उनके आगामी दुमका गीत का इंतजार है, जो इस क्षेत्र की खूबसूरती और पहचान को सुरों में पिरो सकता है। ##### webakhbar.com
