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मयूराक्षी की काव्य गोष्ठी में अचानक बदला मौसम का मिजाज, करा दिया शीतलहर का एहसास

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दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका शहर के सोनवा डंगाल इलाके में बुधवार को अचानक शीत लहर का प्रकोप ऐसा पड़ा कि एक साथ आमने-सामने बैठे लोगों के बीच बात करना भी मुश्किल हो गया। चौंकिए मत, अभी दुमका में मौसम का मिजाज इतना ठंड नहीं हुआ है। दरअसल भीषण ठंडी का एहसास बुधवार को दुमका के जाने माने कवि अरुण सिन्हा के सोनवा डंगाल स्थित आवास में उस समय हुआ जब वरीय कवि व साहित्यकार शंभुनाथ मिस्त्री अपनी कविता का पाठ कर रहे थे। उनकी कविता शीत ऋतु पर आधारित थी। अवसर था मयूराक्षी साहित्यिक मंच के तत्वावधान में आयोजित एक भव्य काव्य गोष्ठी का। गोष्ठी को श्री मिस्त्री ने बतौर अध्यक्ष संबोधित करते हुए कहा कि दुमका की साहित्यिक उर्वरता निरंतर विस्तार पा रही है। कार्यक्रम में उनके द्वारा प्रस्तुत प्रेम विषयक गीत को खूब सराहा गया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा व साहित्य के मूर्धन्य विद्वान डॉ.रामवरण चौधरी बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। गोष्ठी का पहला सत्र समकालीन विषयों पर विमर्श को समर्पित रहा, जिसमें प्रतिभागी कवियों ने सारगर्भित विचार रखे। दूसरे सत्र में कविता पाठ हुआ, जिसकी शुरुआत दुमका के वरीय पत्रकार व कवि डॉ.अमरेन्द्र सुमन ने की। जाने माने कवि राजीव नयन तिवारी, डॉ.नवीन चन्द्र ठाकुर, दुर्गेश नंदन चौधरी, राष्ट्रीय स्तरीय स्वतंत्र पत्रकार, कवि व साहित्यकार अशोक सिंह, धर्मेन्द्र पांडेय, रोहित अंबष्ट, उत्तम डे, केशव सिन्हा,अमित झा और युवा हास्य कवि डॉ.अंजनी शरण जैसे कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। मयूराक्षी साहित्यिक मंच के सचिव अरुण सिन्हा की मुक्तछंद कविताएं और डॉ.रामवरण चौधरी की अंगिका रचनाएं कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही। कार्यक्रम में एक सामूहिक संकलन की घोषणा भी की।

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