दुमकावासियों के लिए सौभाग्य का अवसर : इस्कॉन के रथयात्रा महोत्सव में एक साथ मिल रहा नाम, कथा और श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद
दुमका। सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार कलियुग में मनुष्य के चंचल मन और सीमित साधना-क्षमता को देखते हुए भगवान ने अपनी प्राप्ति के लिए तीन अत्यंत सरल और कल्याणकारी स्वरूप प्रदान किए हैं—श्रीकृष्ण नाम, श्रीमद्भागवत कथा और श्री जगन्नाथ का अर्चा-विग्रह। दुमका में इस्कॉन द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव इन तीनों दिव्य स्वरूपों के एक साथ दर्शन और अनुभूति का दुर्लभ अवसर श्रद्धालुओं को प्रदान कर रहा है। बांधपाड़ा पोखरा चौक स्थित मौसी बाड़ी (डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मारक स्थल) इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। यहां महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी अपने बड़े भाई भगवान बलराम और बहन देवी सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान के इस अर्चा-विग्रह स्वरूप का दर्शन कर रहे हैं और उनके चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
शास्त्रों में कलियुग के लिए भगवान के नाम-स्मरण को सबसे सरल और प्रभावी साधन बताया गया है। भगवान और उनके नाम में कोई भेद नहीं माना गया है। यही कारण है कि मौसी बाड़ी में दिन-रात हरिनाम संकीर्तन और ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र की पवित्र ध्वनि गूंज रही है। कीर्तन और नाम-स्मरण के माध्यम से श्रद्धालु भगवान के नाम स्वरूप का अनुभव कर रहे हैं।
वहीं, श्रीमद्भागवत को भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात शब्द स्वरूप माना गया है। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं, भक्ति और धर्म के गूढ़ संदेश से जोड़ रही है। कथा-श्रवण के माध्यम से भक्त अपने जीवन के क्लेश, अज्ञान और मानसिक अशांति से मुक्ति का मार्ग तलाश रहे हैं।
इस प्रकार इस्कॉन का यह आध्यात्मिक आयोजन भगवान के तीनों कल्याणकारी स्वरूपों—नाम अवतार के रूप में श्रीकृष्ण नाम, शब्द अवतार के रूप में श्रीमद्भागवत और अर्चा अवतार के रूप में श्री जगन्नाथ—का एक साथ साक्षात्कार करा रहा है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्यशाली अवसर माना जा रहा है।
दुमकावासियों के लिए यह किसी सौभाग्य से कम नहीं है कि उनके अपने शहर में भगवान के ये तीनों स्वरूप एक ही स्थान पर सुलभ हो रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को बांधपाड़ा पोखरा चौक स्थित मौसी बाड़ी पहुंचकर महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा का दर्शन करने के साथ-साथ हरिनाम संकीर्तन में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। क्योंकि एक ही स्थान पर भगवान के नाम, कथा और विग्रह—तीनों का ऐसा संगम विरले ही प्राप्त होता है। (webakhbar.com)
