आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर अब जमीन गड़बड़ी का भी केस होगा। हजारीबाग जिले में 2.75 एकड़ खासमहल भूमि से जुड़े एक घोटाला में उनका नाम सामने आया है। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अपनी विस्तृत जांच में पाया है कि जब विनय चौबे हजारीबाग के डीसी थे, उस समय मूलतः एक ट्रस्ट को लीज पर दी गई जमीन सरकारी भूमि घोषित कर 23 निजी व्यक्तियों को अवैध रूप से आवंटित कर दिया गया।
इस घोटाले की जड़ में तत्कालीन डीसी विनय चौबे समेत कई अधिकारी व अन्य लोग शामिल पाए गए हैं। अब एसीबी ने इस घोटाले से जुड़े नामजद अफसरों और लाभार्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा के साथ रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है।
फर्जी दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग
जांच में यह भी उजागर हुआ है कि ट्रस्ट की भूमि को निजी हाथों में सौंपने के लिए फर्जी तरीके से पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल किया गया। विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह नामक व्यक्तियों को इस भूमि का फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी धारक बनाया गया और उनके माध्यम से विक्रय प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
इन लोगों की संलिप्तता आई सामने
विनय कुमार चौबे : तत्कालीन उपायुक्त, हजारीबाग
तत्कालीन खासमहल पदाधिकारी, हजारीबाग
विजय प्रताप सिंह : फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी धारक
सुधीर कुमार सिंह : फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी धारक
एसीबी की रिपोर्ट में क्या सामने आया
वर्ष 1948 में 2.75 एकड़ जमीन ट्रस्ट सेवायत को 30 वर्षों की लीज पर दी गई थी। 1978 में लीज खत्म होने पर इसे 2008 तक नवीनीकृत किया गया। इसके बाद 2008 से 2010 के बीच सुनियोजित प्रशासनिक षड्यंत्र के तहत भूमि को सरकारी घोषित कर 23 लोगों को आवंटित कर दिया गया। तत्कालीन डीसी विनय चौबे ने खासमहल अधिकारी के साथ मिलकर लीज नवीनीकरण के आवेदन से ‘सेवायत’ शब्द को जानबूझकर हटवाया, ताकि उसका अवैध रूप से हस्तांतरण संभव हो सके।