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उपराजधानी से नारद जी : गांधी जी रहते तो खुद पहले हेलमेट पहनते, फिर दूसरों को…

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नारायण, नारायण! प्रभु को मेरा प्रणाम और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं। हां, नारदजी, आपको भी मकर संक्रांति की शुभकामनाएं। कहिये क्या हाल है उपराजधानी का? प्रभु उपराजधानी का हाल तो एकदम ठीक-ठाक है। नगर निकाय चुनाव का समय आ गया है प्रभु। चुनाव की भनक मिलते ही शहर में लोक-लुभावन कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया है। कहीं कम्बल बंट रहा है, तो कहीं मछली भात का भोज चल रहा है। भले ही इन कार्यक्रमों का आयोजन दूसरे नाम से किया जा रहा है, पर प्रभु ये पब्लिक है सब जानती है। प्रभु अभी चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन बहुत जल्द हो जायेगी। अगले माह के अंत तक चुनाव संपन्न होने की संभावना जतायी जा रही है। इससे पहले चुनावी मैदान में कूदने वाले प्रत्याशियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बाजार में हर जगह अब बस नगर निकाय चुनाव के संबंध में ही गपबाजी हो रही है। हां नारद जी यह तो होना ही चाहिए। आखिर चुनाव फिर पांच साल के बाद ही होगा, इसलिए लोगों को खूब सोच-समझकर अपने प्रतिनिधि का चुनाव करने की जरूरत है। हां प्रभु एकदम सही बोले है आप। ऐसा करने से ही हमारे शहर और वार्डों का विकास संभव होगा। खैर प्रभु इस संबंध में अब बाद में चर्चा करेंगे। अच्छा नारद जी आगे का हाल सुनाइये। प्रभु आज बाजार में सड़क सुरक्षा अभियान को लेकर जो दृश्य देखने को मिला उससे बचपन की एक कहानी याद आ गयी। नारदजी आपने ऐसा क्या देख लिया, और आपको कौन सी कहानी याद आ गयी, जरा खुलकर बताइये। प्रभु हमने बचपन में गांधी जी की एक कहानी सुनी थी। कहानी में बताया गया था कि किसी कार्यक्रम के दौरान एक दादी अपने पोते को लेकर गांधी जी से मिलने पहुंची थी। घंटों इंतजार करने के बाद वह गांधी जी से मिल पायी। उन्होंने गांधी जी से अपने पोते की शिकायत करते हुए कहा कि यह मीठा बहुत खाता है। आप ही इसे समझा सकते है कि अधिक मीठा खाना ठीक नहीं है। यह आपकी बात मानेगा, हम तो बोलते-बोलते थक गये है। इस पर गांधी जी ने कहा, ठीक है आप इसे दोबारा तीन दिन के बाद मेरे पास लाना, समझा देंगे। ठीक तीन दिन के बाद दादी अपने पोते के साथ बापू से मिली। इस बार बापू यानी गांधी जी ने बच्चे से कहा कि बेटा अधिक मीठा खाना ठीक नहीं है। इस पर बच्चे ने कहा कि ठीक है बापू, आज के बाद मैं अधिक मीठा नहीं खाऊंगा। बस इतना कहकर गांधीजी ने दादी पोते को घर जाने को कहा। यह सुन दादी ने गांधी जी से कहा कि इतनी सी बात तो आप उस दिन भी कह सकते थे। इतनी सी बात कहने को आपने हमें तीन दिन के बाद क्यों बुलाया? इस पर गांधी जी मुस्कुराते हुए बोले-माई तीन दिन पहले मैं भी खूब मीठा खाता था। भला इस स्थिति में मैं बच्चे को कैसे कहता कि तुम अधिक मीठा मत खाओ। इसलिए पहले मैंने खुद अधिक मीठा खाना छोड़ा, फिर आज आपके पोते को अधिक मीठा नहीं खाने की सलाह दी। प्रभु यह कहानी मुझे आज सड़क सुरक्षा अभियान में शामिल एक-दो ऐसे समाजसेवियों को देखकर याद आयी जो खुद बिना हेलमेट पहने बाइक चलाते नजर आते है और कार्यक्रम में वे ही उन लोगों को फूलों का हार और तिलक लगाकर बाइक चलाते समय हेलमेट पहनने की नसीहत दे रहे थे। प्रभु यह पहला मौका नहीं था, श्रीमान् इससे पहले भी ऐसे कई जागरूकता कार्यक्रम में बिना हेलमेट पहनने वाले लोगों को तिलक और पुष्पमाला पहना चुके है। पर दूसरे दिन श्रीमान् समाजसेवी खुद बाजार में ऐसे बिना हेलमेट पहने स्कूटी व बाइक चलाते नजर आते है जैसे प्रशासन ने उन्हें इसकी छूट दे रखी हो। प्रभु ऐसे समाजसेवियों के स्थान पर आज गांधीजी रहते तो शायद वे दूसरों को जागरूक करने से पहले खुद हेलमेट पहनकर बाइक व स्कूटी चलाना शुरू करते। एकदम सही कहा आपने, नारदजी। जिला प्रशासन को भी ऐसे लोगों को अभियान में शामिल नहीं करना चाहिए। इससे समाज में कानून व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाता है और अभियान खानापूर्ति सा लगता है। ऐसे अभियान में प्रशासन को वैसे लोगों को शामिल करना चाहिए जो खुद नियमों का पालन करता हो। बाकी प्रभु सबकुछ ठीक-ठाक है। उपराजधानी में कुछ दिन विराम लेने के बाद चोरी की सूचना फिर सामने आ जाती है, जो चिंताजनक है। प्रभु इधर दो दिन से ठंड में जरा कमी आयी है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है। बाकी प्रभु अब दूसरे दिन। नमस्कार। ठीक है नारद जी आपको भी नमस्कार।

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