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आतिशबाजी,भजन और पुष्प वर्षा के बीच हुआ श्री कृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव, दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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दुमका। दुमका शहर के बड़ा बांध परिसर में आयोजित ‘श्री श्री 1008 लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ’ के छठे दिन शुक्रवार को उस समय पूरा पंडाल भक्तिमय उल्लास से भर उठा, जब मंच पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री रामचंद्राचार्य जी महाराज (परमहंस स्वामी श्री आगमानंद जी महाराज) के सानिध्य में चल रहे इस महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक विवाह उत्सव का दर्शन किया।

भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम

कथा के दौरान जैसे ही रुक्मिणी विवाह का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ इस दिव्य विवाह का उत्सव मनाया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।आतिशबाजी और प्रसाद वितरणविवाह की खुशी में श्रद्धालुओं ने जमकर आतिशबाजी की, जिससे पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा उठा। आयोजन समिति की ओर से बड़ी मात्रा में महाप्रसाद और मिठाइयों का वितरण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से ग्रहण किया।कथा में बताया रुक्मिणी विवाह का महत्वस्वामी श्री रामचंद्राचार्य जी महाराज ने कथा में बताया कि माता रुक्मिणी विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थीं और उन्होंने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया था।भाई रुक्मी के विरोध के बावजूद उनकी अटूट भक्ति और समर्पण ने भगवान श्रीकृष्ण को विदर्भ आने के लिए प्रेरित किया। महाराज जी ने कहा कि जब प्रेम निष्कलंक और भक्ति अडिग हो, तो स्वयं भगवान भक्त की रक्षा के लिए आते हैं।
भव्य झांकी ने मोहा भक्तों का मन
मंच पर सजी भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी की मनमोहक झांकी, पुष्प वर्षा और सुमधुर भजनों ने पूरे माहौल को दिव्य बना दिया। इस भव्य आयोजन से बड़ा बांध क्षेत्र मानो “मिनी द्वारका” में बदल गया। कथा के दौरान भगवान के पुत्र प्रद्युम्न की वीरता का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
आज होगा महायज्ञ का समापन


महायज्ञ के अंतिम चरण में शनिवार को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा का वाचन होगा, जिसके साथ इस ज्ञान महायज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न होगी।

 

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