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अंगिका को नियोजन नीति नियमावली जेटेट परीक्षा में शामिल करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

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दुमका। अंगिका भाषा-भाषी दुमका के बुद्धिजीवियों सहित साहित्यकारों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संताल परगना प्रमंडल की क्षेत्रीय भाषा अंगिका को नियोजन नीति नियमावली जेटेट परीक्षा में शामिल करने की मांग की है। इस बावत मंगलवार को अंगिका भाषा-भाषी के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित एक ज्ञापन क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, संताल परगना प्रमंडल, दुमका को सौंपा। ज्ञापन में पूर्व विधायक कमलाकांत प्रसाद सिन्हा, साहित्यकार डॉ.रामवरण चौधरी, डॉ.अमरेन्द्र सुमन, अशोक सिंह, विद्यापति झा, डॉ.मनोज कुमार घोष, दुर्गेश कुमार चौधरी, नवीन चंद्र ठाकुर, अरुण सिन्हा, अंजनी शरण, प्रभाष चंद्र ठाकुर, मो.जमील अख्तर, गौतम कुमार, वंशीधर पंडित, विनोद बिहारी सारस्वत, मो.मुसाफिर अंसारी, डॉ.मधुर कुमार सिंह और अखिलेश कुमार झा ने मुख्यमंत्री को बताया है कि संताल परगना प्राचीन भारत के सोलह जनपदों में से एक अंग जनपद का एक हिस्सा रहा है। राजा कर्ण अंग देश के राजा थे, जिनके अस्तित्व का प्रमाण झारखंड में भी है। अंग देश की भाषा थी अंगिका, जो आदिकाल से बोली, लिखी और पढ़ी जाती रही है और आज भी प्रवाह में बनी है। ज्ञापन में यह भी जिक्र किया गया कि तिलका मांझी का कार्य क्षेत्र संताल परगना रहा है और उनके सम्मान में अभिवाजित बिहार राज्य के भागलपुर विश्वविद्यालय का नाम तिलका मांझी विश्वविद्यालय रखा गया है, जहां अंगिका भाषा की पढ़ाई एवं शोध कार्य होता है। पूर्व में भी प्रारंभिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा 2007, झारखंड अधिविद्य परिषद्, रांची द्वारा आयोजित जेटेट 2012, 2016 सहित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग रांची के द्वारा आयोजित वनरक्षी एवं सिपाही नियुक्ति परीक्षा में अंगिका से प्रश्न पूछे जाते रहे हैं। ज्ञात हो कि झारखंड गजट असाधारण अंक संख्या 1084 रांची सोमवार 10 दिसंबर 2018 (ई०) के द्वारा भी अंगिका को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया था। ऐसे में संताल परगना प्रमंडल के प्रमुख क्षेत्रीय भाषा अंगिका को नजर अंदाज करते हुए नियोजन नीति नियमावली जेटेट की परीक्षा में शामिल न करना क्षोभ का विषय है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से अनुरोध करते हुए कहा गया कि संताल परगना प्रमंडल की प्रमुख क्षेत्रीय भाषा ‘अंगिका’ को झारखंड राज्य नियोजन नियमावली में पुनः शामिल करने की कृपा की जाय ताकि भाषा के स्तर पर अंगिका भाषा-भाषी बेरोजगार नौजवानों, छात्र-छात्राओं को इसका लाभ प्राप्त हो सके।

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