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दुमका के उभरते सितारे लियोनार्ड हांसदा का बड़ा ब्रेक, अब संदेश शांडिल्य के साथ करेंगे काम

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अपने परिवार के साथ लियोनार्ड हांसदा।

✍️ अंजनी शरण, दुमका

झारखंड की धरती से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहे उभरते कलाकार लियोनार्ड हांसदा अब अपने संगीत सफर में एक बड़ा कदम रखने जा रहे हैं। वे जल्द ही प्रसिद्ध संगीतकार और गीतकार संदेश शांडिल्य के साथ सहयोग करेंगे, जो “ढोलना” जैसे कालजयी गीतों और कभी खुशी कभी ग़म, चमेली, सोचा ना था और जब वी मेट जैसी चर्चित फिल्मों में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। झारखंड की उपराजधानी दुमका के बंदरजोरी निवासी रूपलाल हांसदा के पुत्र लियोनार्ड ने हाल ही में “दी शक्ति कलेक्टिव” द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की संगीत प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। इस प्रतियोगिता में देशभर से 4,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें स्वयं संदेश शांडिल्य निर्णायक मंडल में शामिल थे। यह जीत उनके करियर का अहम मोड़ साबित हो रही है। इस सफलता के साथ ही लियोनार्ड अपने डेब्यू सिंगल “आंखों से” की रिलीज़ की तैयारी में हैं, जो उनके आगामी एल्बम “इंतज़ार” का हिस्सा होगा। इस गीत में भी उनका सहयोग संदेश शांडिल्य के साथ देखने को मिलेगा। गौरतलब है कि लियोनार्ड ने एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने दुमका में नॉर्वे के विकेन म्यूजिक स्कूल के सहयोग से एक अंतरराष्ट्रीय म्यूजिक कोलैबोरेशन कॉन्सर्ट आयोजित कर नई पहल की थी। उनके लोकप्रिय गीत “तू है कहाँ?” और “गुम हो” को विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लाखों व्यूज मिल चुके हैं। खासकर “गुम हो” को “द इंडियन म्यूजिक डायरी” से विशेष सराहना मिली और यह स्पॉटिफाई के फ्रेश सेक्शन में एक महीने से अधिक समय तक फीचर रहा।

हिंदी के साथ-साथ लियोनार्ड ने संताली संगीत में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके गीत “दीनाम दिन” और “अरण” को उनकी सांस्कृतिक गहराई और मौलिकता के लिए खूब सराहा गया है।

वर्तमान में लियोनार्ड देश के प्रमुख शहरों में लाइव परफॉर्म कर रहे हैं। उन्होंने मुंबई में बैंड गिफू के लिए ओपनिंग एक्ट किया, वहीं दिल्ली के एक प्रतिष्ठित संगीत कार्यक्रम में भी उन्हें आमंत्रित किया गया, जो इंडस्ट्री में उनकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

विकेन म्यूजिक स्कूल, नॉर्वे के पूर्व छात्र लियोनार्ड ने बताया कि जल्द ही वे अपने आगामी प्रोजेक्ट्स के तहत नॉर्वे लौटने वाले हैं, जहां वे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ सहयोग करेंगे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही वे संताली संगीत पर आधारित एक विस्तृत पुस्तक पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें पारंपरिक गीतों और धुनों को शीट म्यूजिक और औपचारिक नोटेशन के माध्यम से संरक्षित किया जायेगा। इस पहल का उद्देश्य आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रमुख शहरों में लाइव प्रस्तुतियां, आगामी एल्बम “इंतज़ार” और सांस्कृतिक संरक्षण की स्पष्ट दृष्टि के साथ लियोनार्ड हांसदा एक ऐसी विशिष्ट आवाज़ बनकर उभर रहे हैं, जो परंपरा और आधुनिक संगीत के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है।

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