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दुमका से कोयला डंपिंग यार्ड हटाने को फिर गरजे आंदोलनकारी, बोले-अब होगी आर-पार की लड़ाई

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दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका के रेलवे स्टेशन परिसर में बने कोयला डंपिंग यार्ड को हटाने की मांग अब एक बार फिर उग्र रूप लेने जा रही है। रविवार को आंदोलनकारियों ने दुमका रेलवे स्टेशन पहुंचकर कोयला डस्ट से पटे स्टेशन परिसर की तस्वीर सामने रखी और प्रशासन व जन प्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप लगाया। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार 75 सप्ताह तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किए जाने के बावजूद न तो स्थानीय लोगों को राहत मिली और न ही रेलवे स्टेशन परिसर में फैल रहे कोयला प्रदूषण पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। लोगों का आरोप है कि कोयला डस्ट के कारण यात्रियों के साथ-साथ आसपास के निवासी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रवि शंकर मंडल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिला प्रशासन और केंद्र सरकार को पंद्रह दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी कोयला डंपिंग यार्ड नहीं हटाया गया, तो आंदोलनकारी एक भी कोयला गाड़ी को चलने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अब जनता आर-पार की लड़ाई के मूड में है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम वर्मा ने कहा कि दुमका को अमृत भारत रेलवे स्टेशन का दर्जा तो मिला, लेकिन यहां यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या कोयला डस्ट की है, जिसने पूरे स्टेशन परिसर को प्रदूषण की चपेट में ले लिया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। रविवार को हुए प्रदर्शन में विष्णु यादव, अभय गुप्ता, अर्जून कापरी, जगन्नाथ पंडित, भास्कर मंडल, मनोज पंडित, जिमी यादव, एनएन पंडित एवं आशीष नायक समेत कई स्थानीय लोग मौजूद थे। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि अब यह लड़ाई केवल कोयला डंपिंग यार्ड हटाने की नहीं, बल्कि दुमका की जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों की लड़ाई बन चुकी है।

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