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एसकेएमयू : स्नातक पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय को शामिल करने का निर्णय

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दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर “भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस नए पाठ्यक्रम को बुधवार को आयोजित बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में अंतिम रूप दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, “भारतीय ज्ञान परंपरा” पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारत की प्राचीन वैदिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, सामाजिक और राजनीतिक परंपराओं से परिचित कराना है, जिससे वे अपने ज्ञान और दृष्टिकोण को भारतीय संदर्भों में विकसित कर सकें। इस पाठ्यक्रम में वेद, वेदांग, सांख्य, योग, न्याय, वेदांत, पुराण, नीति शास्त्र, रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवत गीता, तर्क शास्त्र जैसे विषयों के साथ-साथ अष्टाध्यायी व्याकरण, भारतीय गणित, भारतीय माप प्रणाली, आयुर्वेद, नगरीय नियोजन एवं वास्तुकला, वास्तु शास्त्र, अर्थशास्त्र और शासन, राज्यकला जैसे विषयों को भी सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पाठ्यक्रम में संताल मिथक, मौखिक परंपराएं और पारिस्थितिक ज्ञान जैसे स्थानीय एवं पारंपरिक तत्वों को भी शामिल किया गया है, जिससे क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और प्रसार संभव हो सके। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस विषय के माध्यम से छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा के मूलभूत अवधारणाओं, तात्विक दृष्टिकोण और उनके आधुनिक जीवन में अनुप्रयोग के बारे में गहराई से समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह शिक्षा, शासन, स्वास्थ्य, वास्तुकला और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों को समकालीन संदर्भों में भारतीय दृष्टिकोण से जोड़ने का कार्य करेगा। बुधवार को आयोजित बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में इस पाठ्यक्रम के निर्माण समिति के संयोजक डॉ.अजय सिन्हा, सदस्य डॉ.पूनम हेम्ब्रम, डॉ.अंजनी शर्मा, प्रो.अमिता कुमारी, डॉ.अनिल कुमार एवं डॉ.विनोद मुर्मू उपस्थित थे। बैठक में डॉ.नवीन सिंह, सतना, मध्यप्रदेश बाह्य विशेषज्ञ के रूप में ऑनलाइन शामिल हुए। विश्वविद्यालय के पीआरओ प्रो.दीपक कुमार के अनुसार इस संबंध में कुलपति प्रो.कुनुल कंदीर ने कहा है कि यह पहल न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को साकार करेगी बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान, विज्ञान और दर्शन की जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक स्तर पर सक्षम और संवेदनशील नागरिक बनाएगी।

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