पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा ने नारी मुक्ति दिवस के रूप में मनाई सावित्रीबाई फुले की जयंती
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दुमका। पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा संताल परगना, दुमका ने शनिवार को भारत की प्रथम महिला शिक्षिका महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती को नारी मुक्ति दिवस के रूप में मनाया। मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष असीम कुमार मंडल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ सावित्रीबाई फुले की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोर्चा के संरक्षक दिवाकर महतो ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज में महिलाओं को पढ़ने-लिखने से वंचित रखा जाता था। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, जातिवाद और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर नारी स्वतंत्रता की मजबूत नींव रखी। आज का दिन महिलाओं को उनके अधिकार और सम्मान के
प्रति जागरूक करने का संदेश देता है। केंद्रीय अध्यक्ष श्री मंडल ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति की प्रतीक थीं। उन्होंने शिक्षा को हथियार बनाकर शोषित व वंचित वर्गों और महिलाओं को आत्मसम्मान के साथ जीने की राह दिखाई। पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समानता के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। मोर्चा के केंद्रीय प्रधान महासचिव डॉ.अमरेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि नारी मुक्ति का वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा जब महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर मिलेगा। सावित्रीबाई फुले के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण के लिए संगठित प्रयास करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम को बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष शिवनारायण दर्बे, महासचिव दयामय माजी, कोषाध्यक्ष अजीत कुमार मांझी, सचिव सचिन कुशवाहा आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में अरुण पंजीयारा, अशोक कुमार मंडल, बसंत कुमार, रामकृष्ण कुमार, असित कुशवाहा, प्रदीप वैध, मुकेश मंडल, चंचल वैध, गिरीश वैध, बैकुंठ शर्मा, बासुदेव मंडल, नंदन कुमार, गौतम कुमार, सुशील कापरी, रवींद्रनाथ मांझी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को अपनाने और समाज में शिक्षा एवं समानता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।






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