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इस्कॉन का रथयात्रा महोत्सव : मानो दुमका में उतर आया हो मथुरा-वृंदावन

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दुमका। मंगलवार की शाम दुमका के लिए आम शाम नहीं थी। मौसीबाड़ी परिसर में जैसे ही भक्ति संगीत की स्वर लहरियां गूंजीं और ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का संकीर्तन शुरू हुआ, पूरा वातावरण कृष्णमय हो उठा। भजनों की धुन पर झूमते श्रद्धालु, हरिनाम संकीर्तन में डूबे भक्त और भगवान श्रीजगन्नाथ के जयघोष से गूंजता परिसर… दृश्य कुछ ऐसा था, मानो मथुरा और वृंदावन की भक्ति-धारा दुमका में उतर आई हो।

इस्कॉन दुमका के सात दिवसीय श्रीजगन्नाथ महोत्सव के पांचवें दिन मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) में दिनभर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह की मंगला आरती से शुरू हुआ आध्यात्मिक वातावरण रात तक बना रहा। भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलदेव और माता सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालु लगातार पहुंचते रहे। आरती, भोग, संकीर्तन और दर्शन के बीच पूरा परिसर भगवान के नाम और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

शाम होते-होते मौसीबाड़ी का वातावरण और भी जीवंत हो उठा। सांस्कृतिक संध्या में झारखंड कला केंद्र के विद्यार्थियों ने भगवान श्रीजगन्नाथ और कृष्ण भक्ति पर आधारित नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। मंच पर कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां थीं और सामने बैठे श्रद्धालु कभी तालियों से उत्साह बढ़ा रहे थे तो कभी भक्ति के भाव में डूबे नजर आ रहे थे। इसके बाद जब बाला जोड़ी ने भक्ति संगीत की स्वर-सरिता बहाई तो पूरा पंडाल जैसे कृष्ण नाम में विलीन हो गया। मधुर भजनों के बीच ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण’ महामंत्र का संकीर्तन शुरू हुआ और देखते ही देखते श्रद्धालु भक्ति में झूमने लगे। किसी के हाथ में करताल था, कोई तालियों की लय में साथ दे रहा था और कोई आंखें बंद कर भजन में पूरी तरह डूबा हुआ था। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति का ऐसा अनुभव था, जिसमें संगीत, संकीर्तन और श्रद्धा एकाकार हो गए।

कार्यक्रम का मंच संचालन विकास विद्यालय के निदेशक नवीन कुमार मिश्रा और आरसीसंस ज्वेलर्स की संचालिका समाजसेवी कृष्ण भक्त मनीषा राज वर्मा ने संयुक्त रूप से किया। मंच से कृष्ण भावना और हरिनाम संकीर्तन के महत्व का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं से अपने जीवन में भगवान के पवित्र नाम को अपनाने और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने का आह्वान किया गया। महोत्सव के बीच अब श्रद्धालुओं को 24 जुलाई का इंतजार है, जब भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलदेव और माता सुभद्रा की बहुड़ा यात्रा निकलेगी। मतलब मौसीबाड़ी से भगवान पुनः गिलान पाड़ा स्थित श्री राधा माधव मंदिर लौटेंगे। जिस तरह रथयात्रा के दौरान दुमकावासियों ने उमंग और श्रद्धा के साथ भगवान का रथ खींचा था, उसी तरह अब उल्टा रथयात्रा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। दरअसल, इस्कॉन का यह रथयात्रा महोत्सव दुमका के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है। यह शहर के आध्यात्मिक जीवन में एक ऐसा उत्सव बन गया है, जहां हर शाम भक्ति संगीत, हरिनाम संकीर्तन और भगवान के दर्शन के साथ श्रद्धालु कृष्ण भक्ति के रस में डूब रहे हैं। मौसीबाड़ी में उमड़ती भीड़ और भक्तों के चेहरे पर दिखाई देता आनंद यही कह रहा है—इन दिनों सचमुच दुमका में मथुरा-वृंदावन उतर आया है।

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