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दुमका में शुरू हुआ संताल परगना का लोकप्रिय राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव

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दुमका। दुमका शहर से चार किलोमीटर दूर मयूराक्षी नदी के तट संताल परगना का लोकप्रिय राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव शुक्रवार से प्रारंभ हुआ। 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस मेला का कई चरणों में उद्घाटन किया गया। मुख्य द्वार पर हिजला ग्राम के ग्राम प्रधान ने फीता काटकर मेला का उद्घाटन किया। जबकि अनुमंडल पदाधिकारी कौशल कुमार ने मेला के भीतरी द्वार का फीता काटकर उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने तीरंदाजी कर मेला में खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इससे पहले उल्लास जुलूस निकाला गया था। मेला के औपचारिक शुरुआत से पहले मेला परिसर स्थित मांझी थान में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। सिदो कान्हु मुर्मू कला मंच में उपायुक्त अभिजीत सिन्हा और जिला परिषद् अध्यक्ष जोयेस बेसरा सहित अन्य अतिथियों ने दीप जलाकर मेला का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र में विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बांध दिया। लोकनृत्य, गीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन

किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री सिन्हा ने कहा कि 136वां हिजला मेला महोत्सव केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मेला हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है। उपायुक्त श्री सिन्हा ने कहा

कि हिजला मेला प्राचीनता और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। यहां एक ओर जहां सदियों पुरानी परंपराएं, लोककला और रीति-रिवाज जीवंत रूप में दिखाई देती हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक सुविधाएं और व्यवस्थाएं भी इस आयोजन को नई पहचान दे रही हैं। यही संतुलन इस मेले को विशिष्ट बनाता है। उपायुक्त ने कहा कि सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के सफल आयोजन के पीछे सभी वर्गों का सामूहिक सहयोग है। प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जनजातीय समाज और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन संभव हो सका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए व्यापक और सुव्यवस्थित तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति और सभ्यता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। हिजला मेला जनजातीय अस्मिता, कला और जीवनशैली का ऐसा मंच है, जिसकी गूंज सीमाओं से परे जानी चाहिए। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें, ताकि यहां की पहचान विश्व पटल पर स्थापित हो सके। जिला परिषद् अध्यक्ष श्रीमति बेसरा ने कहा कि हिजला मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी परंपराओं और हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति का जीवंत उत्सव है। 20 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में संताल परगना की लोककला, लोकनृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक वेशभूषा की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी। यह मेला हमारे कलाकारों, कारीगरों और ग्रामीण प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि राजकीय जनजातीय हिजला मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ना है। श्रीमति बेसरा ने युवाओं से नशा से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज को कमजोर करता है। इसके बजाय शिक्षा को अपना साथी बनाएं। शिक्षा ही वह शक्ति है जो हमें आत्मनिर्भर, जागरूक और सक्षम बनाती है। यदि हमारे युवा शिक्षित और जागरूक होंगे, तो हमारा समाज स्वतः सशक्त और विकसित बनेगा। समारोह को ग्राम प्रधान एवं अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी श्री कुमार ने किया।

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