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जीआई टैग से जादोपटिया को मिली वैश्विक पहचान, कृषि मंत्री नेहा तिर्की ने किया पेंटिंग का लोकार्पण

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रांची। झारखंड की पारंपरिक जनजातीय चित्रकला जादोपटिया को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी कला और कलाकारों के लिए सम्मान का नया अध्याय जुड़ गया है। झारखंड आदिवासी महोत्सव के दौरान कृषि मंत्री नेहा तिर्की ने रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित जतरा टाना भगत चित्रांकन प्रशाल में जादोपटिया पेंटिंग का लोकार्पण किया।कैनवास पर जादोपटिया चित्रकला की प्रतिष्ठित चित्रकार एवं आदिवासी चित्रकला अकादमी, दुमका की सचिव डॉ.नीलम नीरद द्वारा उकेरी गई पेंटिंग का लोकार्पण जादोपटिया चित्रकार अर्पिता राज नीरद एवं निताई चित्रकार सहित देशभर से पहुंचे 21 प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ कलाकारों की उपस्थिति में हुआ। लोकार्पण के अवसर पर कृषि मंत्री नेहा तिर्की ने जादोपटिया चित्रकला को जीआई टैग मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने जनजातीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को सराहा। जादोपटिया चित्रकला को जीआई टैग मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चित्रकार डॉ. नीलम नीरद ने कहा कि जिस चित्रकला शैली के लगभग पूरी तरह विलुप्त हो जाने की स्थिति 1990 के आसपास बन गई थी, उसे आज वैश्विक पहचान मिलना करीब 35 वर्षों से किए जा रहे संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में आदिवासी चित्रकला अकादमी, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, दुमका की स्थापना कर जादोपटिया चित्रकला की खोज, नामकरण और संरक्षण का कार्य शुरू किया गया। इसके बाद वर्ष 1995 में बिहार सरकार के संस्कृति, खेल-कूद एवं युवा कार्य विभाग तथा वर्ष 1997 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय एवं वस्त्र मंत्रालय ने इस कला को मान्यता दी। लंबे संघर्ष और संरक्षण के प्रयासों के बाद अब जादोपटिया चित्रकला को जीआई टैग मिलना झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और इससे जुड़े कलाकारों के लिए बड़ी उपलब्धि और सम्मान है। डॉ.नीलम नीरद ने कहा कि जादोपटिया को मिली यह पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पारंपरिक कला को बचाए रखने और इसे देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ ग्राफिक डिजाइनर सोनल सोनी एवं रोहित भी उपस्थित थे।

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