दुमका। झारखंड राज्य बनने के बाद से अभी तक यहां पुस्तकालयाध्यक्ष की बहाली नहीं हुई है, जिससे यहां के प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष का भविष्य अंधेरे में है। सरकार की इस उदासीनता से नाराज अब यहां के प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के मूड में आ गये है। इस बावत सोमवार को यहां केंद्रीय पुस्तकालय परिसर में झारखंड प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्ष संघ की हुई एक बैठक में प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्षों ने राज्य सरकार पर उनलोगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। बैठक में संघ ने राज्य सरकार से झारखंड में पुस्तकालय अधिनियम लागू करने, पुस्तकालयाध्यक्ष पद का सृजन विद्यालय स्तर पर करने, झारखंड के सभी सार्वजनिक पुस्तकालय में नियम के तहत पुस्तकालयाध्यक्ष की बहाली करने, उन सभी विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं अन्य संस्थानों में जहां पुस्तकालयाध्यक्ष का पद रिक्त हो बहाली करने, जेईपीसी के द्वारा वर्ष 2023 में सीएम एक्सीलेंसी स्कूलों में संविदा के आधार पर पुस्तकालयाध्यक्ष भर्ती के लिए 1000 रूपया शुल्क लेकर भी अभी तक बहाली नहीं की गई है, इस पर पुनर्विचार कर शीघ्र बहाली करने, विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में नेक से मान्यता के लिए सिर्फ पुस्तकालयाध्यक्षका उपयोग ना करके वहां अविलंब बहाल करने, पुस्तकालयाध्यक्ष की बहाली के लिए संबंधित सभी विभागों का ध्यान आकृष्ट करने, जामताड़ा स्थित ग्रामीण पुस्तकालय में नियम के अनुसार पुस्तकालयाध्यक्ष की बहाली करने आदि की मांग की। बैठक में मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की भी रणनीति तैयार की गयी। बैठक में दुमका, जामताड़ा, बड़हरवा, पाकुड़ और गोड्डा जिले के प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्षों में विवेक कुमार, जतिन कुमार, प्रगति भारती, संदीप, क्रिस्टीना, शिखा झा, अनुराधा साक्षी, प्रवीण, राज, अमन, रीमा कुमारी, इमरान,नूर, जाहिर, सौरभ दे, यूनेस उमेश, राकेश, सचिन, नकुल, रतन सचिन नंदी, निर्मल, पप्पू, बबलू, सौरभ सिन्हा, सनोती मुर्मू, एवनिकी टुडू, माधव, राजू आदि उपस्थित थे।