आरएसएस के गुरुदक्षिणा कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज को गुरु मानकर व्यक्त किया समर्पण का भाव
दुमका। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला गुरुदक्षिणा कार्यक्रम इस वर्ष दुमका शहर के श्री अग्रसेन भवन में शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र तथा भगवा ध्वज के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। दीप प्रज्वलन के पश्चात गुरुपूजन की विधिवत प्रक्रिया सम्पन्न की गई। इस अवसर पर दुमका जिला संघचालक गणेश अग्रवाल, नगर संघचालक मनोज सिंघानिया, मुख्य अतिथि आयकर अधिकारी राकेशजी एवं बौद्धिक वक्ता एसपी काॅलेज दुमका के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डाॅ.संजीव कुमार मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि संघ में भगवा ध्वज को गुरु का स्थान प्राप्त है। यह केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि संघ के आदर्शों, त्याग, तपस्या, निःस्वार्थ सेवा और राष्ट्रनिष्ठा का जीवंत प्रतीक है। यह ध्वज प्रत्येक स्वयंसेवक को प्रेरणा देता है कि जीवन में व्यक्ति नहीं, आदर्शों को गुरु बनाना चाहिए। संघ में यही ध्वज प्रत्येक विचार, आचरण और कार्य का मार्गदर्शक है। संघ की परंपरा में गुरुपूजन केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि वह आध्यात्मिक यात्रा है जिसमें स्वयंसेवक अपने अहं को त्यागकर, राष्ट्र और संगठन के प्रति पूर्ण समर्पण का संकल्प लेता है। इस पूजन के माध्यम से वह यह प्रतिज्ञा करता है कि उसका जीवन समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित रहेगा। गुरुदक्षिणा संघ की अत्यंत पवित्र परंपरा है। कार्यक्रम में डाॅ.संजीव कुमार ने अपने अपने बौद्धिक सत्र में भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, गुरु वह है जो अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाए, और संघ में यह मार्गदर्शक भगवा ध्वज है। उन्होंने श्रीमद्भागवत, उपनिषदों, और स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए बताया कि कैसे एक स्वयंसेवक का जीवन आदर्श, संयम और राष्ट्रप्रेम पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुदक्षिणा का अर्थ केवल धन देना नहीं है, बल्कि अपने जीवन को सत्य कार्यों में लगाकर समाज और राष्ट्र को वापस देना ही सच्ची दक्षिणा है। डाॅ.संजीव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में लिए गये लक्ष्य पंच परिवर्तन-सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी व आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य पर विस्तार से प्रकाश डाला ताकि इससे समाज इस पांच परिवर्तन के साथ आगे बढ़ सके। संघ के जिला सह सेवा प्रमुख राजू सिंह के अनुसार इस कार्यक्रम में अच्छी संख्या में स्वयंसेवकों ने गुरुपूजन कर गुरुदक्षिणा अर्पित की। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और संघ गीत के साथ किया गया।
