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हिन्दी को आत्मसम्मान और गर्व की भाषा के रूप में अपनाएं : आयुक्त

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दुमका। संताल परगना प्रमंडल के आयुक्त लालचंद डाडेल ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि भारत की एकता, संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। श्री डाडेल हिन्दी दिवस के अवसर पर रविवार को राजभाषा विभाग की ओर से संताल परगना प्रमंडलीय कार्यालय में आयोजित विचार गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिन्दी का अधिक से अधिक प्रयोग करने से न केवल कार्यों में सहजता आती है बल्कि जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करना भी सरल हो जाता है। आयुक्त श्री डाडेल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे हिन्दी को आत्मसम्मान और गर्व की भाषा के रूप में अपनाएं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस महानिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि हिन्दी भाषा सरल, सहज और सर्वसुलभ है। यह भाषा विविधताओं से भरे हमारे समाज को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि तकनीकी और डिजिटल युग में भी हिन्दी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ी रहें। वन प्रमंडल पदाधिकारी सात्विक ने अपने वक्तव्य में हिन्दी भाषा के इतिहास, विकास यात्रा और इसकी विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दी ने समय-समय पर अनेक भाषाओं और बोलियों को आत्मसात कर अपनी अभिव्यक्ति को और भी समृद्ध किया है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन और कार्यक्षेत्र में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाएं। कार्यक्रम के अन्य वक्ताओं ने भी हिन्दी भाषा की गरिमा, इसकी प्रासंगिकता और संवर्धन पर बल देते हुए इसे राष्ट्र की आत्मा और पहचान बताया। विचार गोष्ठी के अंत में सभी ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लिया। कार्यक्रम में राजभाषा विभाग के उप निदेशक शैलेंद्र कुमार रजक, डाॅ.प्रमोदिनी हांसदा, डाॅ.रामवरण चौधरी, डाॅ.खिरोधर प्रसाद यादव, विनय कुमार सिन्हा, पत्रकार मनोज केशरी, डाॅ.अमरेन्द्र सुमन, अशोक सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। गौरतलब है कि विचार गोष्ठी का शुभारंभ प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी व अन्य अतिथियों ने दीप जलाकर किया था।
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