हिन्दी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बोले डाॅ.खिरोधर प्रसाद यादव, केवल भाषा नहीं, भारतीय समाज की आत्मा है हिन्दी

दुमका। संताल परगना महाविद्यालय, दुमका के प्रभारी प्राचार्य डॉ.खिरोधर प्रसाद यादव ने कहा कि हिन्दी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा है। उन्होंने कहा कि यदि हमें लोकतंत्र को मजबूत बनाना है और आम जनता से वास्तविक संवाद स्थापित करना है तो हमें हिन्दी जैसी जनभाषा का सहारा लेना होगा। डाॅ.यादव शनिवार को महाविद्यालय में हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर हिन्दी विभाग के द्वारा आयोजित संगोष्ठी को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी का ज्ञान आवश्यक हो सकता है, लेकिन आम आदमी के साथ उसका रिश्ता हिन्दी ही जोड़ सकती है। आज की जरूरत है कि हम हिन्दी को केवल साहित्य तक सीमित न रखें, बल्कि प्रशासन, शिक्षा, तकनीक और संचार के हर क्षेत्र में इसे और व्यापक बनाएं। जन सरोकार तभी सार्थक होंगे जब उनकी अभिव्यक्ति उनकी अपनी भाषा में हो। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे हिन्दी के विकास को केवल सरकारी औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे अपने जीवन और भविष्य से जोड़कर देखें। ‘जन सरोकारों के लिए हिन्दी’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ.यदुवंश यादव ने कहा कि हिन्दी दिवस मनाने का उद्देश्य केवल हिन्दी का सम्मान करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि जन सरोकारों की भाषा के रूप में हिन्दी की भूमिका कितनी व्यापक है। उन्होंने कहा कि मीडिया, सोशल मीडिया और साहित्य के माध्यम से हिन्दी ने लोगों के बीच संवाद का एक मजबूत सेतु तैयार किया है। आज संताल परगना क्षेत्र में हिन्दी और यहां की जनजातीय भाषाएं एक दूसरे के सरोकारों को सरल रूप में निभा रही हैं। कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.कुमार सौरभ ने कहा कि हिन्दी भाषा का असली सौंदर्य इसकी सरलता और सहजता में है। यही कारण है कि यह विभिन्न वर्गों और समुदायों को एक सूत्र में बांधती है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के साथ डॉ.लीना मुर्मू, डॉ.कमल शिवकांत हरि, डॉ.सुजीत कुमार आर्या, डॉ.उपेंद्र कुमार आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में स्वागत भाषण विभाग की अध्यक्ष प्रो.पुष्पा सोरेन ने दिया था। जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ.अजीत कुमार सिंह ने किया।
