दुमका। संताल परगना महाविद्यालय, दुमका के परीक्षा प्रशाल भवन में शुक्रवार को संताली भाषा के ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की 121वीं जयंती छात्रों द्वारा बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि झारखंड सरकार द्वारा उनकी जयंती पर अवकाश घोषित किया जाना उनके प्रति सम्मान का प्रतीक है। पंडित रघुनाथ मुर्मू का जन्म मई 1905 ई. में उड़ीसा राज्य के मयूरभंज जिला के डांडबोस गांव में बुद्ध पूर्णिमा के दिन हुआ था। उन्हें संताल समाज का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पुनर्जागरणकर्ता, शिक्षाविद् और समाज सुधारक माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1925 में मात्र 20 वर्ष की आयु में ओल चिकी लिपि का आविष्कार कर संताली भाषा को एक विशिष्ट लिखित पहचान प्रदान की। उन्होंने आदिवासी बच्चों को
मातृभाषा में शिक्षा देने की वकालत भी की। उनके प्रयासों से संताली संस्कृति को विलुप्त होने से बचाया जा सका और इसे एक आधुनिक लिखित भाषा के रूप में स्थापित किया गया। यही कारण है कि आज संताली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान प्राप्त है, जिसकी नींव उनके द्वारा विकसित ओल चिकी लिपि ने रखी। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के बीच ओल चिकी लिपि की पुस्तकों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में छात्र नेता राजेंद्र मुर्मू, परेश मुर्मू, सुभाष किस्कू, वरिष्ठ छात्र नायक दास सोरेन, सह छात्र नायक रोहित मुर्मू, आदित्य हांसदा, शिबु मुर्मू, संजय मुर्मू, सिलबास्टर सोरेन, अनुप हांसदा, सेलीना हांसदा, प्रमिला हांसदा, ऐलिशा हांसदा, कुमिला टुडू, मसोती हांसदा, राजमुनी सोरेन, सुनीता मरांडी, अस्मिता सोरेन, प्रमिला हेम्ब्रम, अनु मेम्बरम, नीलम सोरेन, अलपना हांसदा सहित कई छात्र-छात्राएं उपस्थित थी।
