दुमका। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थानीय कार्यालय में रविवार को “संगठित, सशक्त एवं संस्कारित समाज ही सशक्त राष्ट्र का आधार है” विषय पर प्रमुख जनगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित हुआ, जिसमें संगठन की सौ वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत विषय प्रवेश से करते हुए विभाग संपर्क प्रमुख डॉ.संजीव कुमार ने कहा कि सशक्त राष्ट्र का निर्माण सशक्त व्यक्तियों से ही संभव है। उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश की आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए समाज को जागरूक और संगठित होना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आज का भारत शांति और शक्ति दोनों स्तरों पर सशक्त जवाब देने में सक्षम है। मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक बिगेंद्र कुमार ने डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य आत्मविस्मृत समाज को संगठित कर उसमें चेतना और आत्मगौरव का संचार करना रहा है। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने सौ वर्षों के सफर में उपहास, विरोध और आलोचनाओं का सामना करते हुए समाज और राष्ट्र के बीच विश्वास और स्वीकार्यता हासिल की है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आपातकाल (भारत) तक संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने राम मंदिर अयोध्या के निर्माण में
योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ केवल स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य करता रहा है। साथ ही उन्होंने “पंच परिवर्तन” के माध्यम से सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण
संरक्षण जैसे विषयों को जन-जन तक पहुंचाने की योजना पर प्रकाश डाला। संघ चालक गणेश जी ने कहा कि संघ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों—जैसे प्रलोभन आधारित धर्मांतरण, घुसपैठ और सांस्कृतिक आक्रमण का विरोध करता है और समाज को सजग रहने का आह्वान करता है। नगर संघ चालक मनोज सिंघानिया ने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्ध नागरिकों एवं स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए सभी से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। कार्यक्रम का संचालन जिला सह कार्यवाह नरेंद्र मरांडी ने किया। जनगोष्ठी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 200 से अधिक नागरिकों की उपस्थिति रही।
