इस्कॉन दुमका में श्रीमद्भागवत कथा, बोले नारू गोपाल दास प्रभुजी—कृष्ण भक्ति में ही मनुष्य जीवन की सार्थकता
दुमका। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके पवित्र नाम का संकीर्तन मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने का सबसे सरल और आनंदमय मार्ग है। कृष्ण के चरणों में शरणागति, सेवा और भक्ति से जीवन को आध्यात्मिक आनंद से जोड़ा जा सकता है। यह संदेश बुधवार को इस्कॉन सेंटर राज पैलेस, दुमका में मायापुर धाम से पधारे नारू गोपाल दास प्रभुजी ने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान दिया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं में व्यतीत करने के बजाय भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सेवा में लगाना चाहिए। श्रीकृष्ण के पवित्र नाम का स्मरण और संकीर्तन मन को शांति प्रदान करता है तथा व्यक्ति को आध्यात्मिक जीवन की ओर ले जाता है।
कथा के बाद हरिनाम संकीर्तन और मधुर कीर्तन से इस्कॉन सेंटर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। भक्तों ने उत्साह के साथ कीर्तन में भाग लिया और भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के नाम का गुणगान किया। कुछ देर के लिए पूरा परिसर कृष्ण प्रेम और भक्ति की भावधारा में डूबा नजर आया।
कार्यक्रम के अंत में भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। इस्कॉन दुमका के प्रभारी सत्यबाकगुरु दास प्रभु के नेतृत्व व मार्गदर्शन में आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में अच्छी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। ##### webakhbar.com

