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130 साल पुराना है गांदो का दुर्गा मंदिर, रानी शिवसुंदरी ने कराई थी स्थापना
दुमका : दुर्गा पूजा में वार्ड 15 की सफाई व्यवस्था ठप, घरों में सड़ रहा कचरा; दुर्गंध से लोग बेहाल
दुर्गा पूजा विसर्जन जुलूस में अश्लील गाने बजाने पर रोक लगाने की मांग, राष्ट्रीय बजरंग दल ने सौंपा ज्...
माता-पिता के प्रति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सेवा और समर्पण भाव अनुकरणीय : डॉ.शम्स तबरेज़ खान
मां दुर्गा के दर्शन के लिए खुले पूजा पंडालों के पट, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
माँ दुर्गा के बोधन अनुष्ठान के साथ सतन आश्रम में श्रद्धालुओं के लिए खुले मंदिर के पट
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बेथेल मिशन स्कूल में गरबा और डांडिया की धूम, पारंपरिक परिधानों में झूमे छात्र-छात्राएं
दुमका में श्राद्ध के दौरान गाय को लेकर हुआ ऐसा गोलमाल कि पंडित जी के अरमानों पर फिर गया पानी!
श्रद्धा और सबूरी में बसती है साईं भक्ति, लक्ष्मी दे ने व्रत पूरा होने पर श्रद्धालुओं के बीच बांटा प्...
दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डाॅ.संजीव कुमार सिन्हा ने पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां संविधान की अवमानना होती है, वहां तानाशाही जन्म लेता है। डाॅ.सिन्हा संविधान दिवस के अवसर पर बुधवार को विभाग के द्वारा
आयोजित एक विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। भारतीय संविधान की महत्ता एवं उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया तथा इसकी मूल भावना पर विस्तार से प्रकाश डाला। विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए सामाजिक विज्ञान के डीन डॉ.टीपी सिंह ने संविधान की जानकारी प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के
निर्वहन का भी समान महत्व है। विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.विजय कुमार ने संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और गरिमा प्रदान करने की गारंटी देता है। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.अजय सिन्हा ने संविधान सभा में झारखंड से जुड़े सदस्यों के योगदान की चर्चा की। उन्होंने भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष शब्द के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह अधार्मिक राज्य का प्रतीक
नहीं है, बल्कि सर्वधर्म समभाव की भावना को दर्शाता है। उन्होंने प्रस्तावना में उल्लेखित बंधुता, राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर बल देते हुए कहा कि आज भाषा, जाति, धर्म और प्रांत के नाम पर बंधुता को कमजोर करने वाली कई शक्तियां सक्रिय है। ऐसे समय में देश की एकता को मजबूत करने के लिए संविधान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। कार्यक्रम में छात्र झंडू मुर्मू ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डॉ.जय कुमार साह, डॉ.राजीव केरकेट्टा, डॉ.गणेश, शोधार्थी अभिनव, करुणा सहित अच्छी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थी। कार्यक्रम में मंच का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन छात्र अमन ने किया।