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चर्चा में आई ‘विकसित भारत’, एसकेएमयू के पूर्व कुलपति प्रो.डॉ.एम.बशीर अहमद खान की पुस्तक का राज्यपाल ने किया विमोचन

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रांची/दुमका। राजभवन, रांची के लोक भवन में 21 अप्रैल को आयोजित एक गरिमामय समारोह में झारखंड के राज्यपाल  संतोष कुमार गंगवार ने “विकसित भारत : विज़न, वाइटैलिटी और वसुधैव कुटुम्बकम” नमक पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू), दुमका के पूर्व कुलपति प्रो.डॉ.एम.बशीर अहमद खान हैं, जिनकी इस कृति को बौद्धिक जगत में व्यापक सराहना मिल रही है। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और मीडिया प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह पुस्तक एक गंभीर वैचारिक दस्तावेज के रूप में सामने आई है। राज्यपाल श्री गंगवार ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के सभ्यतागत पुनर्जागरण की एक सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने पुस्तक में परंपरा और आधुनिकता के समन्वय को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। करीब 300 पृष्ठों में विस्तृत इस पुस्तक में भारत के विकासवादी चिंतन को प्राचीन से आधुनिक काल तक जोड़ते हुए समग्र विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसमें “विकसित भारत” के लक्ष्य को आर्थिक, सामाजिक, प्रशासनिक, पर्यावरणीय, तकनीकी और सांस्कृतिक छह प्रमुख स्तंभों के आधार पर स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। पुस्तक में “अमृत काल”, 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की परिकल्पना, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन ऊर्जा और ग्रामीण विकास के विभिन्न मॉडलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय विकास मॉडलों के संदर्भ में भारत के लिए संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। इस अवसर पर लेखक प्रो.खान ने कहा कि “विकसित भारत कोई नारा नहीं, बल्कि एक सतत साधना है, जिसमें विभिन्न विचारधाराओं और नीतियों का समन्वय आवश्यक है।” यह पुस्तक जल्द ही प्रमुख शैक्षणिक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगी और नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है।

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