प्रलेस के राज्य सम्मेलन में दुमका के साहित्यकारों की गूंजी आवाज, विनय सौरभ व यदुवंश प्रणय को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
सम्मेलन में दुमका के कवि विनय सौरभ ने “संतलाल का भूत”, विश्वजीत राहा ने “अपने-अपने राम”, कैलाश केशरी ने “ताले से पहले” और नवीन कुमार गुप्ता ने अपनी कविता का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया

दुमका। प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के पांचवें राज्य सम्मेलन में दुमका के साहित्यकारों और कवियों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। रामगढ़ के रजरप्पा स्थित ऑफिसर्स क्लब में 25-26 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय राज्य सम्मेलन में गोड्डा से जुड़े दुमका के चर्चित कवि विनय सौरभ को प्रलेस का राज्य उपाध्यक्ष तथा यदुवंश प्रणय को राज्य सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। सम्मेलन में प्रलेस की दुमका जिला इकाई के जल्द गठन की भी घोषणा की गई। सम्मेलन के प्रथम दिन के प्रथम सत्र की शुरुआत प्रलेस के झंडोत्तोलन के साथ हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ इप्टा के कलाकारों द्वारा शैलेन्द्र के प्रसिद्ध गीत “तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर” की प्रस्तुति के साथ किया गया। इसके बाद लेखकीय और समकालीन विमर्श पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में “इक्कीसवीं सदी में पूंजीवाद का स्वरूप और लेखकीय चुनौती” तथा “समय के संकट और लेखन की चुनौती : संदर्भ- प्रेमचंद और समकालीन विमर्श” विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। पूंजीवाद के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए कथाकार रणेन्द्र ने वर्तमान दौर में पूंजीवाद में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृत्रिम मेधा पूंजीवाद, तकनीकी सामंतवाद और जैव साम्राज्यवाद जैसे विषयों पर अपनी बात रखी।

वहीं लेखकीय चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि समय के यथार्थ को नहीं पहचानना आज का सबसे बड़ा संकट है, जिससे समय रहते उबरना जरूरी है। लेखक शेखर मल्लिक ने संकट के बीच संभावनाओं की तलाश पर जोर दिया, जबकि वक्ता शैलेंद्र ने लेखकों को अपने क्षितिज का विस्तार करते हुए नए सवालों से जूझने की सलाह दी। मुख्य अतिथि सुखदेव सिंह सिरसा ने नए लेखकों को मार्गदर्शन देते हुए रचनाधर्मिता और जनपक्षधरता बनाए रखने की अपील की। अंतिम सत्र में इप्टा के कलाकारों द्वारा सामाजिक संदेश पर आधारित नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया।

सम्मेलन के दूसरे दिन द्वितीय सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इसमें दुमका के कवि विनय सौरभ ने “संतलाल का भूत”, विश्वजीत राहा ने “अपने-अपने राम”, कैलाश केशरी ने “ताले से पहले” और दुमका के ही कवि नवीन कुमार गुप्ता ने अपनी कविता का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा विभिन्न जिलों से आए कवियों ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
इसके बाद प्रगतिशील लेखक संघ की नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया। इसमें गोड्डा से विनय सौरभ को राज्य उपाध्यक्ष और यदुवंश प्रणय को राज्य सचिव की जिम्मेदारी मिली। सम्मेलन में प्रलेस की दुमका जिला इकाई के जल्द गठन की भी घोषणा की गई।राज्य सम्मेलन में अहमद बद्र, प्रो.मिथिलेश, सत्यम, संजय सोलोमन, अर्पिता सहित कई साहित्यकारों की उपस्थिति रही। विभिन्न भाषाओं के कवियों ने काव्य पाठ किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ प्रगतिशील लेखक संघ के पांचवें राज्य सम्मेलन के समापन की घोषणा की गई।


