दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका शहर में सोमवार से तीन दिवसीय गणेश महोत्सव पूरे धूमधाम, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित कर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। पहले दिन गणपति बाबा की पूजा, आरती और प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का शुभारंभ हुआ। शाम होते ही भगवान गणेश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ विभिन्न पूजा स्थलों पर उमड़ पड़ी।

दुमका शहर के बांधपाड़ा, मेन रोड, रेलवे स्टेशन रोड, रसिकपुर, राखाबनी तथा दुधानी नेशनल स्कूल के पीछे भगवान गणेश की सुंदर एवं आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। पूजा स्थलों पर भक्ति गीतों और गणपति बप्पा के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
बड़ा बांध की गणेश पूजा सबसे पुरानी, यहीं लगता है भव्य गणेश मेला

दुमका में गणेश पूजा की बात करें तो बड़ा बांध की गणेश पूजा को शहर की सबसे पुरानी गणेश पूजा के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। यहां वर्षों से गणपति उत्सव श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता रहा है। तीन दिवसीय उत्सव के दौरान यहां विशेष रूप से भव्य गणेश मेला आयोजित किया जाता है, जो शहरवासियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है।

गणेश मेला में पूजा-अर्चना के साथ बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले, खिलौने, खान-पान और अन्य दुकानों की रौनक देखने को मिलती है। आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग मेला देखने और गणपति बप्पा के दर्शन करने पहुंचते हैं।
मेन रोड में सनातनी संघ ने पिछले वर्ष से शुरू की हैं गणेश पूजा

शहर के मेन रोड (नीचे बाजार) में सनातनी संघ की ओर से पिछले वर्ष से गणेश पूजा की शुरुआत की गई है। दूसरे वर्ष भी यहां उत्साह के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है। पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन एवं पूजा की व्यवस्था की गई है।
विघ्नहर्ता की पूजा का है विशेष महत्व

सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति की आराधना करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभता के प्रतीक भी माने जाते हैं। उनका बड़ा मस्तक व्यापक सोच, बड़े कान ध्यानपूर्वक सुनने, छोटी आंखें एकाग्रता और उनका वाहन मूषक विनम्रता एवं इच्छाओं पर नियंत्रण का संदेश देता है। यही कारण है कि गणेश महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोगों को एकता, सद्भाव, अनुशासन और सकारात्मक जीवन का संदेश देने वाला पर्व भी माना जाता है।
तीन दिनों तक रहेगी उत्सव की रौनक
दुमका में गणेश महोत्सव तीन दिनों तक मनाया जा रहा है। इन तीन दिनों में पूजा-अर्चना, आरती और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहेगी। विशेषकर शाम के समय शहर के विभिन्न गणेश पूजा स्थलों पर काफी चहल-पहल देखने को मिल रही है।
गणपति बप्पा के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। शहर में जगह-जगह गणेश उत्सव की रौनक से माहौल भक्तिमय होने के साथ-साथ उत्सवी रंग में रंग गया है। ##### webakhbar.com
