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7 साल साढ़े 8 हजार से ज्यादा मौतें… मौसम और आपदाओं की मार झेलता रहता है झारखंड, देखें आंकड़े

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बीते सात वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं ने झारखंड पर गहरा प्रभाव डाला है। वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक राज्य को सूखा, बाढ़, चक्रवात, बिजली गिरने, ओलावृष्टि, आगजनी, शीतलहर और पेयजल संकट जैसी आपदाओं ने बार-बार घेरा और भारी क्षति पहुंचाई है। राज्य में 2017 से 24 के दौरान विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में 8676 लोगों की मौत हुई, जबकि 4405 पशुओं की क्षति हुई है। दूसरी ओर 2123 घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए। फसलों, मकानों व सार्वजनिक संपत्तियों का भी बड़ा नुकसान हुआ है।

 

झारखंड को साल दर साल आपदा का दंश झेलना पड़ता है। हर साल बढ़ती प्राकृतिक त्रासदियां चेतावनी दे रही हैं। सरकार की रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जिससे आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाने की जरूरत है। साथ ही, राहत और पुनर्वास के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान नितांत आवश्यक हो गया है।राज्य सरकार की तरफ से एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें राहत व बचाव कार्य में सक्रिय रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रशासनिक तैयारियां और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को और दुरुस्त करने की जरूरत है।

 

संपत्ति क्षति भी गंभीर

 

सार्वजनिक संपत्तियों को 12.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि निजी संपत्तियों में 38.53 करोड़ रुपये की क्षति दर्ज की गई। राज्य में सूखा, बाढ़, तूफान, ओलावृष्टि, ठंड की लहर, बिजली गिरना और पेयजल संकट जैसी आपदाएं इन नुकसानों के प्रमुख कारण रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और असंतुलित वर्षा चक्र इसके पीछे मुख्य कारक हैं।

 

कृषि क्षेत्र को भारी क्षति

 

कृषि क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। 2022-23 में अकेले 23,021.80 लाख रुपये की फसल क्षति हुई, जो अब तक की सबसे अधिक है। इसके अलावा 2018-19 में 28,069.17 लाख रुपये और 2019-20 में 1,954.03 लाख रुपये की फसलें बर्बाद हुईं। सात वर्षों में 2874.35 लाख रुपये का फसल नुकसान हुआ।

 

बिजली गिरने से सबसे अधिक गई जान

 

झारखंड में बिजली गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। 2010 से 2024 के दौरान सिर्फ बिजली गिरने से 3147 लोगों की मौत हुई। इसी तरह, सूखे के कारण जल संकट की स्थिति हर साल गंभीर हो रही है। पलामू, लातेहार, गढ़वा और चतरा जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित रहे। ऐसे में आपदा प्रबंधन को सशक्त करना, मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली, पंचायत स्तर पर आपदा योजना, कृषि बीमा और फसल क्षति का त्वरित मुआवजा, जनजागरुकता और प्राथमिक प्रशिक्षण झारखंड की बड़ी जरूरत बन गए हैं।

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