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दरिद्रता दूर भगाने को बिहार में दीपावली पर हुक्का पाती खेलने की हैं परंपरा

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भागलपुर। बिहार में दीपावली के अवसर पर हुक्का पाती खेलने की परम्परा है। इसके लिए बाजार में फूल, गणेश-लक्ष्मी की छोटी-छोटी मूर्तियों, मिठाई और पटाखों के साथ अच्छी संख्या में हुक्का पाती की दुकानें सज गई है। भागलपुर के तिलका मांझी बाजार सहित अन्य स्थानों में 10 रुपए में एक हुक्का पाती बिकते देखा गया। बहुत से लोग इसे घर पर खुद ही बना लेते है। बिहार से सटे झारखंड के संताल परगना प्रमंडल के दुमका, गोड्डा जिला में भी कुछ लोगों को दीपावली पर हुक्का पाती खेलते देखा जाता है। गौरतलब है कि दीपावली की रात घर में लक्ष्मी पूजा के बाद हुक्का पाती खेला जाता है। सनसनाठी (एक प्रकार की एकदम हल्की लकड़ी) से बने हुक्का पाती को घी के दीया से जलाया जाता है। इसके बाद उसे घर के सभी कोनों में घुमाया जाता है। इस दौरान “लक्ष्मी घर दरिद्र बाहर” बोलते हुए हुक्का पाती को घर के बाहर खुले आसमान में लाया जाता है। पंडित विक्रम कुमार झा के अनुसार दीपावली पर हुक्का पाती खेलने से दरिद्रता दूर होकर घर में लक्ष्मी का वास होता है। जबकि खुले आसमान में इसे उपर की ओर दिखाने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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