सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय में 142 स्नातक प्रशिक्षु पदों के लिए कल से शुरू होगी आवेदन की प्रक्रिया
स्थानीय छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण का सुनहरा अवसर, चयन केवल स्नातक अंकों के आधार पर
दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU) ने स्नातक प्रशिक्षु (Graduate Apprentice) के 142 पदों के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी किया है। इस योजना के तहत झारखंड राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज से वर्ष 2021 से 2025 के बीच स्नातक उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकती हैं।
चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण :
चयन पूरी तरह स्नातक में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर होगा। चयनित प्रशिक्षुओं को विश्वविद्यालय मुख्यालय और उसके अंगीभूत महाविद्यालयों में 1 वर्ष के लिए प्रशिक्षण मिलेगा। इस अवधि के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को प्रतिमाह 12,000 रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा।
योजना का महत्व :
स्नातक प्रशिक्षु योजना पहले तकनीकी संस्थानों में लागू थी, अब इसे गैर-तकनीकी संस्थानों तक विस्तारित किया गया है। राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय मुख्यालय एवं महाविद्यालयों के लगभग 15% गैर-शैक्षणिक पदों को स्नातक अप्रेंटिस के लिए आरक्षित किया है।
आवेदन प्रक्रिया :
आवेदन 20 अप्रैल से 5 मई तक ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। योग्य अभ्यर्थियों को सबसे पहले नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्किम के पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा और इसके बाद झारखंड सरकार के अप्रेंटिसशिप मैनेजमेंट पोर्टल पर आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय ने छात्रों से अपील की है कि केवल स्टूडेंट रिसोर्स सेंटर के माध्यम से ही आवेदन करें।
पदों का वितरण :
विश्वविद्यालय मुख्यालय में 20 पद, ए.एस. कॉलेज, देवघर में 10, बी.एस.के. कॉलेज, बरहरवा में 7 पद सहित कुल 21 महाविद्यालयों में 142 पद सृजित हैं।
श्रेणीवार रिक्तियां :
सामान्य (UR) – 62
अनुसूचित जनजाति (ST) – 35
अनुसूचित जाति (SC) – 15
BC-I – 13
BC-II – 6
EWS – 11
विशेष जानकारी :
यह कोई स्थायी नौकरी नहीं है, बल्कि स्थानीय छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग देने का अवसर है। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर अनुबंध स्वतः समाप्त हो जाएगा।
जनसम्पर्क पदाधिकारी डॉ.दीपक कुमार के अनुसार :
“यह योजना छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और प्रशासनिक कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षु अनुभव हासिल करेंगे और विश्वविद्यालय कार्यों में योगदान देंगे।”
