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शिक्षा, संस्कार और नवाचार का एक प्रेरक शैक्षिक मॉडल है दुमका का उत्क्रमित मध्य विद्यालय डुमरथर

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दुमका। दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड के आदिवासी बहुल गांव डुमरधर स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय आज केवल दुमका ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक शैक्षिक मॉडल के रूप में उभर चुका है। इस बदलाव के केंद्र में हैं विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ.सपन पत्रलेख, जिनके नवाचार और समर्पण ने ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा दी है।

कोरोना काल में जन्मा था अनोखा ‘ब्लैकबोर्ड मॉडल’

कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरे देश में स्कूलों की पढ़ाई बाधित हो गई थी, तब डॉ.सपन पत्रलेख ने एक ऐसा नवाचार विकसित किया जिसने शिक्षा को घर-घर तक पहुंचा दिया। उनका ‘ब्लैकबोर्ड मॉडल’ आज शिक्षा जगत में एक मिसाल बन चुका है।

इस मॉडल की खासियत यह थी कि गांव के घरों की बाहरी दीवारों को ही ब्लैकबोर्ड में बदल दिया गया। उन पर प्रतिदिन पाठ, गणित के सवाल और सामान्य ज्ञान लिखे जाते थे। बच्चे वहीं बैठकर पढ़ाई करते और बाद में अपने माता-पिता व दादा-दादी को भी वही ज्ञान सिखाते थे। इस प्रयोग ने ग्रामीण क्षेत्र में साक्षरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस नवाचार की चर्चा उस समय राष्ट्रीय स्तर पर हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसकी सराहना की।

संस्कार और शिक्षा का अनूठा संगम

हाल ही में जब वेबअखबार डॉट कॉम के संवाददाता विद्यालय पहुंचे तो सभी बच्चों ने चरण स्पर्श कर अतिथि का सम्मान किया। यह दृश्य विद्यालय में दिए जा रहे संस्कारों की गहराई को दर्शाता है। बच्चों ने अपना परिचय आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में दिया, जो उनकी बढ़ती भाषा दक्षता का प्रमाण है।

स्वच्छता में राज्य में अव्वल विद्यालय

विद्यालय के मुख्य द्वार पर ‘5 स्टार’ रैंकिंग स्पष्ट रूप से अंकित है। जानकारी के अनुसार, स्वच्छता के मामले में यह विद्यालय झारखंड में प्रथम स्थान पर रहा है, जिसके कारण सरकार द्वारा इसे यह उच्चतम रैंक प्रदान की गई है।

हरियाली, पर्यावरण और संवेदनशीलता की मिसाल

विद्यालय परिसर फूलों और औषधीय पौधों से भरा हुआ है। एक ओर किचन गार्डन और दूसरी ओर हर्बल गार्डन बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। गर्मी को देखते हुए बच्चों ने पक्षियों के लिए मिट्टी के पात्रों में पानी की व्यवस्था कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है।

बालिकाओं के लिए सुरक्षित वातावरण

विद्यालय में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) कक्ष की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी बच्ची को अचानक स्थिति में असुविधा न हो। यह सुविधा संभवतः जिले के विद्यालयों में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है।

आधुनिक शिक्षा सुविधाएं

विद्यालय में सुसज्जित पुस्तकालय और कंप्यूटर कक्ष भी मौजूद है, जो बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

भाषा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण

आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण अधिकांश बच्चे संथाली भाषा बोलते हैं। ऐसे में प्रधानाध्यापक डॉ.सपन पत्रलेख ने स्वयं संथाली भाषा सीखकर बच्चों और अभिभावकों से संवाद स्थापित किया है। यह प्रयास शिक्षा को और अधिक प्रभावी एवं सरल बनाता है।

प्रेरणा का जीवंत उदाहरण

डॉ.सपन पत्रलेख का यह समर्पण और नवाचार यह साबित करता है कि सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव संभव हैं। उनका कार्य नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के उस विचार को साकार करता है कि—

“एक बच्चा, एक शिक्षक, एक किताब और एक कलम दुनिया बदल सकते हैं।”

डुमरधर का यह विद्यालय आज ग्रामीण भारत में शिक्षा, संस्कार और नवाचार का एक जीवंत मॉडल बनकर उभरा है, जिसकी गूंज अब जिले से आगे राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई देने लगी है।

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