दुमका। कुछ पल ऐसे होते हैं, जो आंखों के सामने से गुजर तो जाते हैं, लेकिन हृदय में हमेशा के लिए बस जाते हैं। दुमका में इस्कॉन द्वारा आयोजित श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव का समापन शुक्रवार को बाहुड़ा रथ यात्रा के साथ हुआ। लेकिन यह विदाई केवल एक यात्रा का समापन नहीं थी, बल्कि उन भक्तों के लिए भावनाओं का ऐसा सागर था, जिसमें प्रेम, विरह और भक्ति तीनों एक साथ उमड़ पड़े।
16 जुलाई से भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी, बड़े भाई भगवान बलराम और बहन देवी सुभद्रा के आगमन से बांध पाड़ा स्थित मौसी बाड़ी भक्ति के प्रकाश से जगमगा उठा था। हर दिन यहां श्रद्धा, भजन और हरे कृष्ण महामंत्र की मधुर ध्वनि गूंजती रही। लेकिन शुक्रवार को जब महाप्रभु अपने निज धाम लौटे तो वही मौसी बाड़ी कुछ पल के लिए सूनी-सूनी नजर आई। ऐसा लगा मानो घर का कोई अपना सदस्य विदा हो गया हो।
बांध पाड़ा स्थित मौसी बाड़ी से पूरे विधि-विधान और भक्तिमय वातावरण में बाहुड़ा रथ यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचने के लिए उमड़ पड़े। रथ की रस्सी को स्पर्श करने और उसे खींचने के लिए भक्तों में अद्भुत उत्साह दिखाई दिया। कोई हाथ जोड़कर खड़ा था, तो कोई भाव-विभोर होकर महाप्रभु के जयकारे लगा रहा था।
बाहुड़ा यात्रा के दौरान भक्ति के अनेक रंग देखने को मिले। कोई श्रद्धालु महाप्रभु के प्रेम में नृत्य कर रहा था, तो कोई हरे कृष्ण महामंत्र की धुन पर भक्ति में झूम रहा था। वहीं कुछ भक्त सेवा भाव से रथ यात्रा के मार्ग पर झाड़ू लगाकर अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे थे। उनके लिए यह केवल सड़क की सफाई नहीं, बल्कि अपने आराध्य के स्वागत और सेवा का एक पवित्र अवसर था। भक्ति, सेवा और समर्पण का यह अद्भुत संगम हर किसी के हृदय को छू रहा था। क्या महिला, क्या पुरुष, क्या बच्चे और क्या बुजुर्ग—हर कोई कृष्ण प्रेम में डूबा नजर आया। पूरा शहर “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे, हरे राम हरे…” महामंत्र से गुंजायमान हो उठा। ऐसा लग रहा था मानो दुमका की धरती पर स्वयं भक्ति की गंगा प्रवाहित हो रही हो।
बाहुड़ा यात्रा गिलान पाड़ा स्थित श्री राधा माधव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। यहां कुछ देर विश्राम के बाद महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी अपनी बहन देवी सुभद्रा और बड़े भाई भगवान बलराम के साथ राज पैलेस, शिवपहाड़ स्थित इस्कॉन मंदिर के लिए प्रस्थान कर गए।
महाप्रभु की विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। मौसी बाड़ी के आसपास रहने वाले भक्त, जो पिछले कई दिनों से प्रभु के सानिध्य का आनंद ले रहे थे, आज उनकी विदाई के समय भावुक हो उठे। कई भक्तों की आंखों से प्रेम और विरह के आंसू छलक पड़े। यह दृश्य भगवान श्रीकृष्ण के वृंदावन छोड़कर द्वारिका जाने के समय गोपियों और ब्रजवासियों के विरह की याद दिला रहा था। जिस प्रकार ब्रजवासियों के लिए कृष्ण का वियोग असहनीय था, उसी प्रकार आज दुमकावासी भक्तों के लिए जगन्नाथ महाप्रभु का मौसी बाड़ी से जाना भावनाओं से भरा क्षण बन गया। लेकिन
कृष्ण भक्त जानते हैं कि यह दूरी स्थायी नहीं होती। विरह में भी मिलन की आशा छिपी होती है। भक्तों ने अपने मन को यह कहकर सांत्वना दी कि “महाप्रभु अगले वर्ष फिर आएंगे और फिर मौसी बाड़ी को अपने आगमन से पावन करेंगे।” अब दुमका के श्रद्धालु महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी का दर्शन राज पैलेस, शिवपहाड़ स्थित इस्कॉन मंदिर में कर सकेंगे। रथ यात्रा महोत्सव भले ही संपन्न हो गया हो, लेकिन इसकी भक्ति, प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक अनुभूति लंबे समय तक भक्तों के हृदय में जीवंत रहेगी। इस्कॉन दुमका के प्रभारी सत्यबाक गुरुदास प्रभु के कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन में आयोजित श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव 2026 के सफल आयोजन में कृष्ण भक्त मनीषा राज वर्मा, नवीन कुमार मिश्रा, करुण कुमार राय, राजेश कुमार सिंह उर्फ बबलू जी आदि की भूमिका उल्लेखनीय है।
