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सरस्वती शिशु विद्या मंदिर दुमका में व्यास पूजन एवं गुरु दक्षिणा कार्यक्रम, गुरु की महत्ता और भारतीय शिक्षा पद्धति पर हुआ मंथन

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दुमका। भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत की दुमका इकाई के तत्वावधान में मंगलवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, दुमका में व्यास पूजन एवं गुरु दक्षिणा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा परंपरा, गुरु की महत्ता और शिक्षा में भारतीयता के समावेश को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.कलानंद ठाकुर ने भारतीय शिक्षा पद्धति में गुरु के स्थान और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में भारतीय शिक्षा एवं शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है। अध्यक्षीय संबोधन में संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक प्रोफेसर डॉ.राजेंद्र पांडेय ने “राष्ट्रीय” शब्द की व्यापकता को स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि ज्ञान, सभ्यता, संस्कृति और परस्पर आत्मीयता से जुड़े नागरिकों का सुविस्तृत क्षेत्र है। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्राचार्य कुमार विमलेश ने भारतीय शिक्षण पद्धति एवं संस्कृति-संस्कारों के संरक्षण में विद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्यास पूजन के महत्व को बताते हुए गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर बताया। संस्कृत विभाग के डॉ.नृपेन्द्र पाठक ने भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय वाक्य “सा विद्या या विमुक्तये” की व्याख्या करते हुए शिक्षा में भारतीयता के समावेश के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के सचिव सूरज केसरी, अश्वनी जी सहित कई शिक्षक एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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