एसकेएमयू में जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं समावेशन पर कार्यशाला शुरू, कुलपति ने समानता आधारित समाज पर दिया जोर
दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू), दुमका में सोमवार को जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं समावेशन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट अकादमी एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक शामिल हुए। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कुलपति प्रो.(डॉ.) कुनुल कांदिर ने कहा कि जेंडर सेंसिटाइजेशन किसी एक वर्ग का विषय नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और न्यायपूर्ण समाज की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे वातावरण का निर्माण करना भी है, जहां हर विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी को समान अवसर एवं सम्मान मिले। कुलपति ने कहा कि
विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षित और समावेशी बनाने के लिए संवेदनशील सोच जरूरी है। उन्होंने कार्यशाला में मिले अनुभव और जानकारी को अपने-अपने संस्थानों में लागू करने की अपील की। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने जेंडर समानता, संवैधानिक मूल्यों, समावेशन और शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक वातावरण निर्माण जैसे विषयों पर प्रतिभागियों के साथ चर्चा की। रिसोर्स पर्सन प्रेमलता पूनिया एवं आर.सचदेवा ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को
प्रशिक्षित किया। इस अवसर पर जेएसएफडीए के नोडल पदाधिकारी डॉ.सुजीत कुमार सोरेन ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। वहीं झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट अकादमी के समन्वयक डॉ.पीयूष मालपहाड़िया और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, रांची के मैनेजर (एकेडमिक) विशाल प्रसाद ने उच्च शिक्षा में समावेशी संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। कार्यशाला का संचालन डॉ.हिमाद्रि शेखर दत्ता ने किया। दो दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 अगस्त तक चलेगा, जिसमें तकनीकी एवं सहभागितापूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
