गर्व का पल : जिस कॉलेज में कभी पढ़े और फिर पढ़ाया, आज उसी कॉलेज के प्राचार्य बने डॉ.रणजीत कुमार सिंह
दुमका/साहिबगंज। कुछ कहानियां केवल पद और उपलब्धियों की नहीं होतीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और उस संस्थान के प्रति कृतज्ञता की होती हैं, जिसने किसी व्यक्ति के सपनों को आकार दिया हो। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है डॉ. रणजीत कुमार सिंह की, जिन्होंने जिस साहिबगंज कॉलेज की कक्षाओं में बैठकर अपने भविष्य की नींव रखी, आज उसी कॉलेज की जिम्मेदारी संभालने का गौरव हासिल किया है। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका ने मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य डॉ.रणजीत कुमार सिंह को साहिबगंज कॉलेज, साहिबगंज का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उस कॉलेज के लिए भी गर्व का क्षण है, जहां डॉ. रणजीत कभी एक सामान्य छात्र के रूप में ज्ञान अर्जित करने आते थे। डॉ.रणजीत कुमार सिंह ने अपनी उच्च शिक्षा की पूरी यात्रा साहिबगंज कॉलेज से ही पूरी की। उन्होंने इसी कॉलेज से इंटर, बीएससी, एमएससी और पीएचडी की डिग्री हासिल की। वर्ष 2008 में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से भूगर्भ विज्ञान के सहायक प्रोफेसर के रूप में उनकी नियुक्ति हुई और उनका शिक्षकीय सफर भी इसी कॉलेज से शुरू हुआ। जिस संस्थान ने उन्हें छात्र के रूप में तराशा, उसी संस्थान में उन्होंने शिक्षक बनकर नई पीढ़ी को ज्ञान दिया और अब उसी कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य के रूप में नेतृत्व करने का अवसर मिला है। यह किसी भी शिक्षक और विद्यार्थी के लिए जीवन की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। वेबअखबार से बातचीत में डॉ.रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि साहिबगंज कॉलेज से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कॉलेज ने उन्हें पहचान दी, उसी की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
आज निश्चित रूप से साहिबगंज कॉलेज भी अपने इस होनहार छात्र पर गर्व महसूस कर रहा होगा, जिसने अपनी मेहनत और लगन से उसी परिसर में छात्र से शिक्षक और फिर प्राचार्य तक का सफर तय किया है। डॉ.रणजीत उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कभी-कभी वही संस्थान आपको सम्मान के साथ वापस बुलाता है, जहां से आपने अपने सपनों की शुरुआत की थी।
