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झारखंड राज्य स्थापना रजत जयंती समारोह में राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए जन सहभागिता और सामूहिक प्रयासों पर जोर

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दुमका। दुमका के सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि आज हम सभी झारखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ हर्ष और गर्व के साथ मना रहे हैं। झारखंड राज्य का निर्माण एक लम्बे और ऐतिहासिक जन आंदोलन का परिणाम है। आदिवासी समाज तथा यहां के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो यह स्वर्गीय शिबू सोरेन की दूरदर्शी सोच थी। उनका यह दृढ़ विश्वास था कि अलग राज्य के गठन के बिना इस क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं है। श्री सोरेन शनिवार को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन के द्वारा स्थानीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले सांसद श्री सोरेन सहित जामा विधायक डॉ.लुईस मरांडी, जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुंवर, जिला परिषद् अध्यक्ष जोयेस बेसरा और उपाध्यक्ष ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सांसद श्री सोरेन ने कहा कि 15 नवम्बर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के साथ ही विकास की नई यात्रा प्रारंभ हुई, जो आज भी समान गति से आगे बढ़ रही है। जहां कभी लोगों को सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब सरकार तथा जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से स्वच्छ पेयजल घर-घर तक पहुंच रहा है। खेतों तक पानी पहुंचाने और किसानों की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएं चलायी जा रही है। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष का यह झारखंड और अधिक विकसित, सशक्त और समृद्ध बनें इसके लिए हम सभी का सहभागी बनना आवश्यक है। झारखंड का उज्ज्वल भविष्य जन सहभागिता और सामूहिक प्रयासों पर ही निर्भर करता है। जामा विधायक डॉ.लुईस मरांडी ने कहा कि झारखंड अब युवावस्था में प्रवेश कर चुका है। आज हम सभी गर्व के साथ राज्य स्थापना दिवस मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों की यात्रा में झारखंड ने कहां-कहां प्रगति की है और किन क्षेत्रों में और आगे बढ़ने की आवश्यकता है, इस पर विचार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के अंतिम व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इस कार्य को जमीन पर उतारने में जिला प्रशासन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डॉ.मरांडी ने अपने संबोधन में राज्य सरकार के द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी। जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुंवर ने कहा कि 25 वर्ष का यह झारखंड आज अनेक सकारात्मक परिवर्तनों का प्रतीक बन चुका है। राज्य ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब इसे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक सशक्त और अग्रणी राज्य के रूप में पहचान दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर और अधिक प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि गुरुजी स्वर्गीय शिबू सोरेन के लंबे संघर्ष और अदम्य इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि हमें अपना अलग राज्य झारखंड प्राप्त हुआ है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि इस राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सामूहिक रूप से सोचा जाए, योजनाएं बनाईं जाय और उन्हें दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया जाए। श्री कुंवर ने कहा कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा, ताकि हमारा राज्य विकास, समृद्धि और प्रगति का नया उदाहरण बन सके। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि 25 वर्ष पूर्व जिस झारखंड राज्य ने अपने अस्तित्व की पहली सांस ली थी, आज वह अपनी प्राकृतिक संपदा, जनजातीय गौरव, मेहनतकश लोगों और साहसिक परंपराओं के लिए पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। पिछले 25 वर्षों में हमारे राज्य ने विकास के अनेक आयामों को छुआ है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, कृषि, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है। उन्होंने कहा कि दुमका जिला भी इस प्रगति की यात्रा में निरंतर आगे बढ़ते हुए नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से आज दुमका जिला पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। उपायुक्त ने अपने संबोधन में दुमका जिले में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हुए विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पथ निर्माण के क्षेत्र में भी दुमका जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उपायुक्त ने दुमका जिले में राज्य सरकार के द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की भी जानकारी दी। उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान ने कहा कि झारखंड की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय विरासत और विकास की निरंतर यात्रा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि शासन की नीतियों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा जन भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार प्रतिबद्ध है। जिला परिषद् अध्यक्ष जोयस बेसरा ने कहा कि 25 वर्ष पहले दुमका की विकास गति बहुत धीमी थी, पर आज हमें कई विकासात्मक कार्य जिले में देखने को मिल रही है। कार्यक्रम को पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार, वन प्रमंडल पदाधिकारी सात्विक व्यास आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सरकार के विभिन्न योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से 1855 में हुई संताल हुल की कहानी को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने झारखंड की परंपरा और संस्कृति को संरक्षित करते हुए राज्य के सतत विकास और प्रगति के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहने का शपथ भी लिया।

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