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एसकेएमयू में “द आर्ट ऑफ लिविंग” पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू

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दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में सोमवार से झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट अकादमी (जेएसएफडीए) एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम “द आर्ट ऑफ लिविंग” शुरू हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में 22 मई  तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.राजीव रंजन शर्मा ने की। इस अवसर पर वित्त सलाहकार ब्रजनंदन ठाकुर, सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ.तरणी प्रसाद सिंह, झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट अकादमी रांची के केन्द्र समन्वयक डॉ.पीयूष मलपहारिया तथा विश्वविद्यालय के जेएसएफडीए नोडल पदाधिकारी डॉ.सुजीत कुमार सोरेन विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में “आर्ट ऑफ लिविंग” के विशेषज्ञ के रूप में बेंगलुरु से पहुंचे कृत्य मिश्रा एवं गौतम जगन्नाथ ने प्रतिभागियों को जीवन प्रबंधन, मानसिक संतुलन, तनाव मुक्ति, ध्यान तथा सकारात्मक जीवन शैली के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य, आत्मानुशासन और आंतरिक शांति अत्यंत आवश्यक है, जिसे “आर्ट ऑफ लिविंग” के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलसचिव डॉ.शर्मा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, कार्यक्षमता वृद्धि तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रम का पूर्ण लाभ उठाने का आह्वान किया। सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ.सिंह ने कहा कि वर्तमान समय की तनावपूर्ण जीवनशैली और बदलते शैक्षणिक परिवेश में समय प्रबंधन, अनुशासन तथा मानसिक संतुलन प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी के लिए आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कार्यभार के दबाव के बीच “आर्ट ऑफ लिविंग” जैसे कार्यक्रम व्यक्तित्व विकास एवं आंतरिक ऊर्जा के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जेएसएफडीए रांची के केन्द्र समन्वयक डॉ.पीयूष ने झारखंड सरकार द्वारा संचालित संकाय विकास कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षकों के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ.हिमांद्री शेखर ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी एवं अच्छी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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