दुमका से कोयला डंपिंग यार्ड हटाने की मांग को लेकर उपायुक्त को दिया ज्ञापन, केंद्रीय रेल मंत्री को भी भेजी प्रतिलिपि
दुमका। उपराजधानी दुमका के रेलवे स्टेशन परिसर में संचालित कोयला डंपिंग यार्ड को हटाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। सोमवार को स्थानीय नागरिकों एवं आंदोलनकारियों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर रेलवे साइडिंग से हो रहे प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याओं और जनजीवन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को गंभीरता से उठाया। ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी भेजी गई है।ज्ञापन में कहा गया है कि दुमका रेलवे स्टेशन घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है और इसके आसपास कई प्रमुख शिक्षण संस्थान मौजूद हैं। इनमें संताल परगना महाविद्यालय, दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज, आदित्य नारायण महाविद्यालय,
पॉलिटेक्निक कॉलेज, वेस्टर्न प्लस टू स्कूल, संत मेरी स्कूल समेत कई विद्यालय शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्टेशन परिसर में कोयला ढुलाई और डंपिंग के कारण लगातार उड़ने वाली कोयले की धूल से विद्यार्थियों, यात्रियों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 से बीजीआर कंपनी द्वारा दुमका रेलवे साइडिंग पर कोयला ढुलाई का कार्य किया जा रहा है, जबकि यात्री आवागमन वाले रेलवे स्टेशन पर इस तरह की गतिविधियां नियमों के विपरीत हैं। इससे पूरे क्षेत्र में वायु एवं ध्वनि प्रदूषण फैल रहा है। आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि कोल डंपिंग यार्ड के खिलाफ पिछले 75 सप्ताह से प्रत्येक रविवार को रेलवे स्टेशन परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ज्ञापन में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गए सीटीओ (कंसेंट टू ऑपरेट) पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों की अनदेखी का आरोप भी लगाया गया है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही कोयला डंपिंग यार्ड को घनी आबादी वाले क्षेत्र से हटाकर किसी निर्जन स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने फूलो-झानो चौक पर अनिश्चितकालीन धरना देने की भी बात कही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दुमका रेलवे स्टेशन को प्रदूषण मुक्त बनाने और नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अविलंब कार्रवाई की जाए। उपायुक्त को ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में रवि शंकर मंडल के साथ विष्णु यादव,अभय गुप्ता,अर्जून कापरी, जिमी यादव, जगरनाथ पंडित और आशीष नायक शामिल थे।
